प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय इतिहास की प्रमुख युद्धें/लड़ाईयां 2026

भारत के प्रमुख युद्ध - Part 1 (प्राचीन भारत)

⚔ भारत के प्रमुख युद्ध

| प्राचीन और मध्यकालीन भारत के प्रमुख युद्ध

1. दसराज्ञ युद्ध (Battle of Ten Kings)

काल: लगभग 1500-1200 ईसा पूर्व
स्थान: परुष्णी नदी (वर्तमान रावी नदी)
पक्ष: राजा सुदास बनाम दस जनजातियों का संघ

ऋग्वेद में वर्णित यह भारत के सबसे प्राचीन ज्ञात युद्धों में से एक माना जाता है। भरत जनजाति के राजा सुदास के विरुद्ध दस शक्तिशाली जनजातियों ने गठबंधन बनाया। युद्ध का मुख्य कारण क्षेत्रीय प्रभुत्व और नदी क्षेत्र पर नियंत्रण था।

राजा सुदास ने अपनी सैन्य रणनीति और भौगोलिक ज्ञान के आधार पर गठबंधन सेनाओं को पराजित कर दिया।

विजेता: राजा सुदास
परिणाम: भरत जनजाति की शक्ति बढ़ी और वैदिक सभ्यता के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ।

2. हाइडेस्पीज़ का युद्ध (326 ईसा पूर्व)

स्थान: झेलम नदी (Hydaspes River)
पक्ष: सिकंदर महान बनाम राजा पोरस

जब मकदूनिया का विजेता सिकंदर भारत पहुँचा तो उसका सामना पौरव राज्य के शासक राजा पोरस से हुआ। पोरस की सेना में हाथियों का बड़ा दल था जबकि सिकंदर के पास अनुभवी घुड़सवार सेना थी।

युद्ध अत्यंत भीषण था। पोरस ने असाधारण वीरता दिखाई, लेकिन अंततः सिकंदर विजयी रहा।

विजेता: सिकंदर महान
परिणाम: पोरस को पुनः उसका राज्य लौटा दिया गया और उसे सहयोगी शासक बनाया गया।

3. चंद्रगुप्त मौर्य और सेल्यूकस निकेटर का युद्ध (305 ईसा पूर्व)

पक्ष: चंद्रगुप्त मौर्य बनाम सेल्यूकस निकेटर

सिकंदर की मृत्यु के बाद उसके सेनापति सेल्यूकस निकेटर ने भारतीय क्षेत्रों पर नियंत्रण बनाए रखने का प्रयास किया। चंद्रगुप्त मौर्य ने उससे युद्ध किया।

मौर्य सेना की शक्ति के सामने सेल्यूकस को पराजय का सामना करना पड़ा।

विजेता: चंद्रगुप्त मौर्य
परिणाम: अफगानिस्तान और बलूचिस्तान के कई क्षेत्र मौर्य साम्राज्य में शामिल हुए।

4. कलिंग युद्ध (261 ईसा पूर्व)

पक्ष: सम्राट अशोक बनाम कलिंग राज्य
स्थान: वर्तमान ओडिशा

मौर्य साम्राज्य के विस्तार के लिए अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया। यह भारतीय इतिहास का सबसे रक्तरंजित युद्ध माना जाता है।

युद्ध में लगभग एक लाख लोगों की मृत्यु हुई और कई लाख लोग घायल हुए।

विजेता: सम्राट अशोक
परिणाम: अशोक ने हिंसा त्यागकर बौद्ध धर्म अपनाया और धम्म नीति की शुरुआत की।

5. शुंग-यवन संघर्ष

काल: दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व
पक्ष: पुष्यमित्र शुंग बनाम इंडो-ग्रीक (यवन)

मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद यवन शक्तियों ने उत्तर-पश्चिम भारत में अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास किया।

पुष्यमित्र शुंग ने सफलतापूर्वक यवन आक्रमणों का प्रतिरोध किया।

विजेता: शुंग साम्राज्य
परिणाम: मध्य भारत में भारतीय सत्ता बनी रही।

6. सातवाहन-शक युद्ध

पक्ष: गौतमीपुत्र शातकर्णी बनाम शक शासक नहपान

दक्षिण और पश्चिम भारत में प्रभुत्व के लिए सातवाहन और शक शक्तियों के बीच कई संघर्ष हुए।

गौतमीपुत्र शातकर्णी ने नहपान को पराजित किया।

विजेता: सातवाहन साम्राज्य
परिणाम: दक्कन क्षेत्र में सातवाहन शक्ति मजबूत हुई।

7. हर्षवर्धन और पुलकेशिन द्वितीय का युद्ध (630-634 ई.)

पक्ष: हर्षवर्धन बनाम चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय

उत्तर भारत के सम्राट हर्षवर्धन दक्षिण भारत तक अपना साम्राज्य फैलाना चाहते थे। लेकिन चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने उनका मार्ग रोक दिया।

नर्मदा नदी के निकट दोनों सेनाओं के बीच निर्णायक युद्ध हुआ।

विजेता: पुलकेशिन द्वितीय
परिणाम: हर्षवर्धन दक्षिण भारत में विस्तार नहीं कर सके। नर्मदा नदी उत्तर और दक्षिण भारत की राजनीतिक सीमा बन गई।

8. सिंध विजय का युद्ध (712 ई.)

पक्ष: मोहम्मद बिन कासिम बनाम राजा दाहिर

अरब सेनापति मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण किया। राजा दाहिर ने बहादुरी से प्रतिरोध किया लेकिन अरब सेना विजयी रही।

विजेता: मोहम्मद बिन कासिम
परिणाम: भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लामी शासन का पहला स्थायी प्रवेश हुआ।

9. नंद-मौर्य संघर्ष (लगभग 322 ईसा पूर्व)

पक्ष: चंद्रगुप्त मौर्य बनाम धनानंद
स्थान: मगध (पाटलिपुत्र)

नंद वंश उस समय भारत का सबसे शक्तिशाली राजवंश था। चाणक्य की रणनीति और नेतृत्व में चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद शासन के विरुद्ध अभियान शुरू किया।

कई संघर्षों और राजनीतिक रणनीतियों के बाद धनानंद पराजित हुआ।

विजेता: चंद्रगुप्त मौर्य
परिणाम: मौर्य साम्राज्य की स्थापना हुई और भारत में पहली बार विशाल केंद्रीकृत साम्राज्य बना।

10. मौर्य साम्राज्य बनाम उत्तर-पश्चिमी यूनानी शक्तियाँ

काल: तृतीय शताब्दी ईसा पूर्व

सेल्यूकस की पराजय के बाद भी उत्तर-पश्चिम सीमा पर छोटे-छोटे संघर्ष जारी रहे। मौर्य शासकों ने सीमाओं की सुरक्षा के लिए कई सैन्य अभियान चलाए।

विजेता: मौर्य साम्राज्य
परिणाम: उत्तर-पश्चिमी सीमाएँ सुरक्षित रहीं।

11. इंडो-ग्रीक (यवन) आक्रमण

काल: दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व

बैक्ट्रिया के यूनानी शासकों ने भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों पर कई बार आक्रमण किए। सबसे प्रसिद्ध शासकों में डेमेट्रियस और मेनांडर (मिलिंद) शामिल थे।

भारतीय शक्तियों ने कई क्षेत्रों में प्रतिरोध किया।

परिणाम: भारतीय और यूनानी संस्कृति का मिश्रण विकसित हुआ जिसे गांधार कला के रूप में जाना जाता है।

12. शुंग बनाम यवन युद्ध

पक्ष: पुष्यमित्र शुंग बनाम यवन शक्तियाँ

मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद यवन शासकों ने मध्य भारत तक बढ़ने का प्रयास किया। शुंग शासकों ने उनका सफलतापूर्वक मुकाबला किया।

विजेता: शुंग साम्राज्य
परिणाम: मध्य भारत में विदेशी प्रभाव सीमित रहा।

13. शक बनाम सातवाहन युद्ध

पक्ष: गौतमीपुत्र शातकर्णी बनाम नहपान

दक्षिण और पश्चिम भारत के व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण के लिए लंबे समय तक संघर्ष हुआ।

गौतमीपुत्र शातकर्णी ने नहपान को हराकर सातवाहन शक्ति को पुनर्जीवित किया।

विजेता: सातवाहन साम्राज्य
परिणाम: पश्चिमी भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र सातवाहनों के अधीन आए।

14. कुषाण विजय अभियान

पक्ष: कुषाण शासक कनिष्क और विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियाँ

कनिष्क ने उत्तर भारत, मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया।

उसके सैन्य अभियानों ने कुषाण साम्राज्य को उस समय की प्रमुख शक्ति बना दिया।

विजेता: कुषाण साम्राज्य
परिणाम: मध्य एशिया और भारत के बीच व्यापार और सांस्कृतिक संबंध मजबूत हुए।

15. समुद्रगुप्त के दिग्विजय अभियान

काल: चौथी शताब्दी ईस्वी

समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है। उसने उत्तर भारत, मध्य भारत और दक्षिण भारत में अनेक सैन्य अभियान चलाए।

प्रयाग प्रशस्ति में उसकी विजयों का विस्तृत वर्णन मिलता है।

विजेता: समुद्रगुप्त
परिणाम: गुप्त साम्राज्य भारत की सबसे शक्तिशाली शक्ति बन गया।

16. चंद्रगुप्त द्वितीय बनाम शक शासक

पक्ष: चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) बनाम पश्चिमी क्षत्रप

गुप्त साम्राज्य ने पश्चिमी भारत के शक शासकों के विरुद्ध अभियान चलाया।

चंद्रगुप्त द्वितीय ने निर्णायक विजय प्राप्त की।

विजेता: चंद्रगुप्त द्वितीय
परिणाम: गुजरात और मालवा गुप्त साम्राज्य में शामिल हुए।

17. हूण आक्रमण और स्कंदगुप्त

काल: पाँचवीं शताब्दी ईस्वी

हूणों ने उत्तर-पश्चिम भारत पर बार-बार आक्रमण किया।

स्कंदगुप्त ने उन्हें कई युद्धों में पराजित कर भारत की रक्षा की।

विजेता: स्कंदगुप्त
परिणाम: कुछ समय के लिए हूणों का विस्तार रुक गया।

18. यशोधर्मन बनाम हूण शासक मिहिरकुल

काल: छठी शताब्दी ईस्वी

मालवा के शासक यशोधर्मन ने हूण शासक मिहिरकुल को पराजित किया।

विजेता: यशोधर्मन
परिणाम: भारत में हूण शक्ति का पतन शुरू हुआ।

19. हर्षवर्धन बनाम शशांक

पक्ष: हर्षवर्धन बनाम गौड़ शासक शशांक

अपने भाई राज्यवर्धन की मृत्यु के बाद हर्षवर्धन ने शशांक के विरुद्ध अभियान चलाया।

परिणाम: उत्तर भारत में हर्ष की शक्ति मजबूत हुई।

20. हर्षवर्धन बनाम पुलकेशिन द्वितीय

स्थान: नर्मदा क्षेत्र

उत्तर भारत के सम्राट हर्ष दक्षिण भारत में विस्तार करना चाहते थे। चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने उन्हें रोक दिया।

विजेता: पुलकेशिन द्वितीय
परिणाम: नर्मदा नदी उत्तर और दक्षिण भारत की राजनीतिक सीमा बन गई।

21. अरब-सिंध युद्ध (712 ईस्वी)

पक्ष: मोहम्मद बिन कासिम बनाम राजा दाहिर

उमय्यद खिलाफत ने सिंध पर आक्रमण किया। राजा दाहिर ने प्रतिरोध किया लेकिन पराजित हुए।

विजेता: मोहम्मद बिन कासिम
परिणाम: सिंध में अरब शासन की स्थापना हुई।

📜 प्राचीन भारत के युद्धों का निष्कर्ष

वैदिक काल से लेकर 712 ईस्वी तक के युद्धों ने भारतीय राजनीति, संस्कृति, धर्म, व्यापार और प्रशासन को गहराई से प्रभावित किया। मौर्य, गुप्त, सातवाहन, कुषाण, चालुक्य और हर्ष जैसे शक्तिशाली साम्राज्यों का उदय एवं पतन इन्हीं संघर्षों के माध्यम से हुआ।

इन्हीं युद्धों ने मध्यकालीन भारत के लिए आधार तैयार किया, जहाँ आगे राजपूत, अरब, तुर्क और सल्तनत शक्तियों का उदय हुआ।

22. राजस्थान में अरब-राजपूत संघर्ष (738 ई.)

स्थान: राजस्थान
पक्ष: अरब सेना बनाम राजपूत संघ

सिंध विजय के बाद अरब सेनाओं ने राजस्थान और पश्चिमी भारत में विस्तार का प्रयास किया। राजपूत शासकों ने संयुक्त रूप से अरबों का विरोध किया।

गुर्जर-प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम तथा अन्य राजपूत शासकों ने अरब सेनाओं को पराजित किया।

विजेता: राजपूत संघ
परिणाम: अरब विस्तार भारत के अंदर रुक गया।

23. नागभट्ट प्रथम बनाम अरब सेना

काल: 8वीं शताब्दी

गुर्जर-प्रतिहार वंश के संस्थापक नागभट्ट प्रथम ने पश्चिमी भारत में अरब सेनाओं को कई बार पराजित किया।

विजेता: नागभट्ट प्रथम
परिणाम: गुर्जर-प्रतिहार शक्ति का उदय।

24. त्रिपक्षीय संघर्ष (750–950 ई.)

पक्ष: पाल वंश, राष्ट्रकूट वंश, गुर्जर-प्रतिहार वंश

कन्नौज पर अधिकार के लिए लगभग दो शताब्दियों तक संघर्ष चलता रहा।

यह भारतीय इतिहास का सबसे लंबा राजनीतिक संघर्ष माना जाता है।

परिणाम: किसी एक शक्ति को स्थायी सफलता नहीं मिली। कन्नौज कई बार हाथ बदलता रहा।

25. धर्मपाल के अभियान

पक्ष: पाल साम्राज्य बनाम उत्तर भारतीय राज्य

पाल शासक धर्मपाल ने बंगाल से लेकर कन्नौज तक प्रभाव स्थापित करने का प्रयास किया।

परिणाम: पाल साम्राज्य पूर्वी भारत की प्रमुख शक्ति बना।

26. राष्ट्रकूट सम्राट गोविंद तृतीय के अभियान

काल: 9वीं शताब्दी

गोविंद तृतीय ने उत्तर भारत तक अभियान चलाए और अनेक शासकों को पराजित किया।

विजेता: राष्ट्रकूट साम्राज्य

27. मिहिर भोज के सैन्य अभियान

पक्ष: गुर्जर-प्रतिहार बनाम पड़ोसी शक्तियाँ

मिहिर भोज को गुर्जर-प्रतिहार वंश का सबसे शक्तिशाली शासक माना जाता है।

परिणाम: उत्तरी भारत में प्रतिहारों का प्रभुत्व स्थापित हुआ।

28. चोल-राष्ट्रकूट संघर्ष

स्थान: दक्षिण भारत

दक्षिण भारत में चोल और राष्ट्रकूट शक्तियों के बीच लंबे समय तक संघर्ष चला।

परिणाम: दक्षिण भारत की राजनीतिक स्थिति में बड़ा परिवर्तन आया।

29. राजराज चोल के विजय अभियान

काल: 985–1014 ई.

राजराज चोल ने दक्षिण भारत, श्रीलंका तथा समुद्री क्षेत्रों में अभियान चलाए।

विजेता: चोल साम्राज्य
परिणाम: चोल शक्ति चरम पर पहुँची।

30. राजेंद्र चोल का समुद्री अभियान

काल: 11वीं शताब्दी

राजेंद्र चोल ने दक्षिण-पूर्व एशिया तक नौसैनिक अभियान चलाया।

विजेता: चोल साम्राज्य
परिणाम: भारतीय नौसैनिक शक्ति का स्वर्णकाल।

31. महमूद गजनवी का पहला भारतीय आक्रमण (1001 ई.)

पक्ष: महमूद गजनवी बनाम जयपाल

गजनवी ने भारत में अपने आक्रमणों की शुरुआत हिंदूशाही शासक जयपाल के विरुद्ध की।

विजेता: महमूद गजनवी

32. पेशावर का युद्ध (1001 ई.)

पक्ष: जयपाल बनाम महमूद गजनवी

यह महमूद गजनवी और हिंदूशाही राज्य के बीच निर्णायक युद्ध था।

विजेता: महमूद गजनवी
परिणाम: उत्तर-पश्चिम भारत में गजनवी प्रभाव बढ़ा।

33. वैहिंद का युद्ध (1008 ई.)

पक्ष: आनंदपाल का राजपूत संघ बनाम महमूद गजनवी

आनंदपाल ने अनेक राजपूत शासकों को एकजुट कर महमूद का सामना किया।

विजेता: महमूद गजनवी
परिणाम: पंजाब क्षेत्र पर गजनवी नियंत्रण मजबूत हुआ।

34. सोमनाथ अभियान (1025 ई.)

पक्ष: महमूद गजनवी बनाम सोमनाथ क्षेत्र के रक्षक

महमूद गजनवी ने गुजरात स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया।

विजेता: महमूद गजनवी
परिणाम: भारी लूट और आर्थिक क्षति।

35. चालुक्य-चोल युद्ध

काल: 11वीं शताब्दी

दक्षिण भारत में पश्चिमी चालुक्यों और चोलों के बीच लगातार युद्ध हुए।

परिणाम: दक्षिण भारत की शक्ति संतुलन व्यवस्था बदलती रही।

36. मोहम्मद गौरी का मुल्तान अभियान (1175 ई.)

स्थान: मुल्तान
पक्ष: मोहम्मद गौरी बनाम इस्माइली शासक

भारत में स्थायी साम्राज्य स्थापित करने के उद्देश्य से मोहम्मद गौरी ने अपना पहला प्रमुख अभियान मुल्तान के विरुद्ध चलाया।

मुल्तान पर अधिकार स्थापित कर उसने भारत में आगे बढ़ने का मार्ग सुरक्षित किया।

विजेता: मोहम्मद गौरी
परिणाम: भारत में तुर्की विस्तार की शुरुआत।

37. गुजरात का युद्ध (कयादरा का युद्ध, 1178 ई.)

स्थान: कयादरा (गुजरात)
पक्ष: मोहम्मद गौरी बनाम चालुक्य वंश

गुजरात विजय के उद्देश्य से गौरी ने पश्चिम भारत पर आक्रमण किया।

चालुक्य सेना ने उसे निर्णायक रूप से पराजित किया।

विजेता: चालुक्य वंश
परिणाम: गौरी कई वर्षों तक गुजरात की ओर बढ़ने का साहस नहीं कर सका।

38. पंजाब विजय अभियान (1186 ई.)

पक्ष: मोहम्मद गौरी बनाम गजनवी वंश

गौरी ने लाहौर पर अधिकार कर गजनवी सत्ता का अंत कर दिया।

विजेता: मोहम्मद गौरी
परिणाम: पंजाब तुर्क शक्ति का मुख्य आधार बना।

39. भटिंडा का युद्ध (1190 ई.)

स्थान: भटिंडा किला
पक्ष: मोहम्मद गौरी बनाम पृथ्वीराज चौहान

गौरी ने भटिंडा किले पर कब्जा कर लिया।

इस घटना ने पृथ्वीराज चौहान और गौरी के बीच निर्णायक संघर्ष की भूमिका तैयार की।

परिणाम: तराइन के प्रथम युद्ध का मार्ग प्रशस्त हुआ।

40. तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.)

स्थान: तराइन (वर्तमान हरियाणा)
पक्ष: पृथ्वीराज चौहान बनाम मोहम्मद गौरी

राजपूत शक्तियों ने संयुक्त रूप से गौरी का सामना किया।

युद्ध में पृथ्वीराज की सेना ने अद्भुत वीरता दिखाई। गौरी गंभीर रूप से घायल हुआ।

विजेता: पृथ्वीराज चौहान
परिणाम: गौरी को युद्धक्षेत्र छोड़कर भागना पड़ा।

41. तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.)

स्थान: तराइन
पक्ष: पृथ्वीराज चौहान बनाम मोहम्मद गौरी

पहली हार के बाद गौरी ने नई रणनीति, तेज घुड़सवार सेना और तीरंदाजों के साथ पुनः आक्रमण किया।

राजपूत सेना ने बहादुरी से युद्ध किया लेकिन तुर्की सैन्य रणनीति अधिक प्रभावी सिद्ध हुई।

विजेता: मोहम्मद गौरी
परिणाम: दिल्ली और उत्तरी भारत में तुर्की शासन का मार्ग खुल गया।

42. अजमेर अभियान (1192 ई.)

पक्ष: मोहम्मद गौरी बनाम चौहान राज्य

तराइन की विजय के बाद गौरी ने अजमेर पर अधिकार स्थापित किया।

विजेता: मोहम्मद गौरी
परिणाम: चौहान शक्ति कमजोर हुई।

43. दिल्ली विजय (1192–1193 ई.)

पक्ष: कुतुबुद्दीन ऐबक बनाम स्थानीय राजपूत शक्तियाँ

गौरी के सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली पर अधिकार स्थापित किया।

विजेता: कुतुबुद्दीन ऐबक
परिणाम: दिल्ली तुर्की सत्ता का केंद्र बनी।

44. मेरठ और बरन अभियान (1193 ई.)

पक्ष: कुतुबुद्दीन ऐबक बनाम स्थानीय राजपूत राज्य

तुर्क सेनाओं ने गंगा-यमुना दोआब के क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करना शुरू किया।

विजेता: तुर्क सेना

45. चंदावर का युद्ध (1194 ई.)

स्थान: चंदावर (वर्तमान उत्तर प्रदेश)
पक्ष: जयचंद बनाम मोहम्मद गौरी

गहड़वाल वंश के शक्तिशाली शासक जयचंद और गौरी के बीच निर्णायक संघर्ष हुआ।

जयचंद वीरतापूर्वक लड़े लेकिन युद्ध में मारे गए।

विजेता: मोहम्मद गौरी
परिणाम: कन्नौज और गंगा घाटी पर तुर्की प्रभाव स्थापित हुआ।

46. बयाना अभियान (1195 ई.)

पक्ष: तुर्क सेना बनाम जादौन राजपूत

राजस्थान और उत्तर भारत के किलों पर नियंत्रण हेतु तुर्क सेनाओं ने कई अभियान चलाए।

विजेता: तुर्क सेना

47. ग्वालियर विजय (1196 ई.)

पक्ष: कुतुबुद्दीन ऐबक बनाम ग्वालियर राज्य

ग्वालियर का दुर्ग मध्य भारत का महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र था।

विजेता: कुतुबुद्दीन ऐबक
परिणाम: मध्य भारत में तुर्क प्रभाव बढ़ा।

48. गुजरात अभियान (1197 ई.)

पक्ष: कुतुबुद्दीन ऐबक बनाम चालुक्य राज्य

तुर्क सेना ने गुजरात में अभियान चलाकर कई नगरों पर अधिकार किया।

विजेता: तुर्क सेना

49. कालिंजर का युद्ध (1202 ई.)

पक्ष: कुतुबुद्दीन ऐबक बनाम चंदेल शासक

कालिंजर का किला चंदेल शक्ति का प्रमुख केंद्र था।

विजेता: कुतुबुद्दीन ऐबक
परिणाम: बुंदेलखंड क्षेत्र में तुर्क प्रभाव बढ़ा।

50. बिहार विजय अभियान (1202–1203 ई.)

पक्ष: बख्तियार खिलजी बनाम स्थानीय शासक

बख्तियार खिलजी ने बिहार पर अधिकार स्थापित किया।

विजेता: बख्तियार खिलजी

51. नालंदा और विक्रमशिला क्षेत्र अभियान

काल: 1203 ई.

बिहार विजय के दौरान बौद्ध शिक्षा केंद्रों को भारी क्षति पहुँची।

परिणाम: प्राचीन भारतीय बौद्ध शिक्षा व्यवस्था को गंभीर आघात।

52. बंगाल विजय (1204 ई.)

पक्ष: बख्तियार खिलजी बनाम लक्ष्मण सेन

तुर्क सेनाओं ने बंगाल पर अचानक आक्रमण किया।

विजेता: बख्तियार खिलजी
परिणाम: बंगाल में तुर्की शासन की स्थापना।

53. दिल्ली सल्तनत की स्थापना (1206 ई.)

घटना: कुतुबुद्दीन ऐबक का राज्यारोहण

मोहम्मद गौरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने स्वतंत्र शासक के रूप में सत्ता संभाली।

परिणाम: दिल्ली सल्तनत की औपचारिक स्थापना हुई। राजपूत काल का अंत और सल्तनत काल का प्रारंभ माना जाता है।

54. तराइन के बाद राजपूत विद्रोह (1206–1210 ई.)

पक्ष: कुतुबुद्दीन ऐबक बनाम विभिन्न राजपूत राज्य

दिल्ली सल्तनत की स्थापना के बाद अनेक राजपूत राज्यों ने स्वतंत्रता पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया।

परिणाम: कई क्षेत्रों में तुर्की नियंत्रण बना रहा, लेकिन संघर्ष जारी रहे।

55. बदायूँ अभियान

काल: 13वीं शताब्दी प्रारंभ

गंगा-यमुना क्षेत्र पर नियंत्रण मजबूत करने हेतु सल्तनत ने कई सैन्य अभियान चलाए।

विजेता: दिल्ली सल्तनत

56. इल्तुतमिश बनाम ताजुद्दीन यिलदिज़ (तराइन युद्ध, 1216 ई.)

स्थान: तराइन

गौरी साम्राज्य के उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष हुआ।

इल्तुतमिश ने यिलदिज़ को पराजित कर दिल्ली की स्वतंत्र सत्ता को मजबूत किया।

विजेता: इल्तुतमिश
परिणाम: दिल्ली सल्तनत की स्थिति मजबूत हुई।

57. इल्तुतमिश बनाम नासिरुद्दीन कुबाचा (1228 ई.)

स्थान: सिंध क्षेत्र

इल्तुतमिश ने सिंध के शासक कुबाचा को पराजित कर सल्तनत का विस्तार किया।

विजेता: इल्तुतमिश

58. बंगाल पुनर्विजय अभियान

पक्ष: इल्तुतमिश बनाम बंगाल के विद्रोही शासक

बंगाल में बार-बार विद्रोह होते रहे जिन्हें दबाने के लिए अभियान चलाए गए।

परिणाम: बंगाल पुनः सल्तनत के अधीन आया।

59. चंगेज़ खान का भारत की सीमा तक आगमन (1221 ई.)

पक्ष: मंगोल साम्राज्य एवं ख्वारिज्म शासक

चंगेज़ खान भारत की सीमा तक पहुँचा, लेकिन उसने दिल्ली सल्तनत पर सीधा आक्रमण नहीं किया।

परिणाम: भारत मंगोल विनाश से बच गया।

60. रज़िया सुल्तान के विरुद्ध तुर्क अमीरों का संघर्ष

काल: 1236–1240 ई.

रज़िया सुल्तान के शासन का विरोध तुर्क सरदारों ने किया।

परिणाम: रज़िया सुल्तान की सत्ता समाप्त हुई।

61. भटिंडा का संघर्ष (1240 ई.)

पक्ष: रज़िया सुल्तान बनाम मलिक अल्तूनिया

रज़िया को सत्ता बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा।

विजेता: अल्तूनिया एवं विरोधी अमीर

62. मंगोल आक्रमण (1241 ई.)

स्थान: लाहौर

मंगोलों ने लाहौर पर आक्रमण कर भारी विनाश किया।

विजेता: मंगोल सेना
परिणाम: उत्तर-पश्चिम सीमा की कमजोरी उजागर हुई।

63. बलबन के सीमांत अभियान

काल: 1266–1287 ई.

सुल्तान बलबन ने मंगोलों तथा विद्रोहियों के विरुद्ध कठोर सैन्य नीति अपनाई।

परिणाम: सल्तनत की सीमाएँ सुरक्षित हुईं।

64. मेवात अभियान

पक्ष: बलबन बनाम मेवाती विद्रोही

मेवात क्षेत्र में लगातार विद्रोह होते थे।

विजेता: बलबन

65. दोआब अभियान

स्थान: गंगा-यमुना दोआब

सल्तनत ने राजस्व नियंत्रण और सुरक्षा के लिए कई सैन्य अभियान चलाए।

परिणाम: प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत हुआ।

66. बंगाल विद्रोह दमन

पक्ष: बलबन बनाम तुगरिल खान

बंगाल के गवर्नर तुगरिल खान ने विद्रोह कर स्वतंत्रता की घोषणा कर दी।

विजेता: बलबन
परिणाम: विद्रोह कुचल दिया गया।

67. मंगोल संघर्ष (1279 ई.)

स्थान: पंजाब सीमा

मंगोलों ने पुनः आक्रमण किया लेकिन बलबन की सेना ने उन्हें रोक दिया।

विजेता: दिल्ली सल्तनत

68. मंगोल आक्रमण (1285 ई.)

पक्ष: मंगोल बनाम दिल्ली सल्तनत

बलबन के पुत्र मुहम्मद खान ने मंगोलों से युद्ध किया।

परिणाम: मंगोल रोके गए, लेकिन मुहम्मद खान युद्ध में मारे गए।

69. पंजाब सीमा रक्षा अभियान

काल: बलबन शासनकाल

सीमा सुरक्षा के लिए किलों का निर्माण और स्थायी सेना तैनात की गई।

परिणाम: मंगोलों के विरुद्ध मजबूत सुरक्षा व्यवस्था।

70. खिलजी क्रांति (1290 ई.)

पक्ष: खिलजी गुट बनाम गुलाम वंश

जलालुद्दीन खिलजी ने सत्ता प्राप्त कर गुलाम वंश का अंत कर दिया।

विजेता: जलालुद्दीन खिलजी
परिणाम: खिलजी वंश की स्थापना।

71. जलालुद्दीन खिलजी बनाम मलिक छज्जू विद्रोह (1290 ई.)

पक्ष: जलालुद्दीन खिलजी बनाम मलिक छज्जू

खिलजी वंश की स्थापना के तुरंत बाद कई तुर्क अमीरों ने विद्रोह किया। मलिक छज्जू का विद्रोह सबसे प्रमुख था।

विजेता: जलालुद्दीन खिलजी
परिणाम: खिलजी सत्ता मजबूत हुई।

72. देवगिरि पर पहला खिलजी आक्रमण (1294 ई.)

पक्ष: अलाउद्दीन खिलजी बनाम यादव वंश

अलाउद्दीन ने सुल्तान बनने से पहले देवगिरि पर हमला किया।

विजेता: अलाउद्दीन खिलजी
परिणाम: विशाल धन-संपत्ति प्राप्त हुई।

73. अलाउद्दीन खिलजी का सत्ता संघर्ष (1296 ई.)

पक्ष: अलाउद्दीन खिलजी बनाम जलालुद्दीन समर्थक

जलालुद्दीन की हत्या के बाद अलाउद्दीन ने दिल्ली की गद्दी प्राप्त की।

विजेता: अलाउद्दीन खिलजी

74. गुजरात विजय अभियान (1299 ई.)

पक्ष: अलाउद्दीन खिलजी बनाम वाघेला वंश

गुजरात उस समय व्यापार और धन का प्रमुख केंद्र था।

विजेता: अलाउद्दीन खिलजी
परिणाम: गुजरात दिल्ली सल्तनत के अधीन आया।

75. प्रथम मंगोल आक्रमण (1299 ई.)

पक्ष: मंगोल सेना बनाम दिल्ली सल्तनत

मंगोलों ने पंजाब होते हुए भारत पर आक्रमण किया।

विजेता: दिल्ली सल्तनत

76. रणथंभौर का युद्ध (1301 ई.)

पक्ष: हम्मीर देव चौहान बनाम अलाउद्दीन खिलजी

रणथंभौर का किला राजपूत शक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र था।

विजेता: अलाउद्दीन खिलजी
परिणाम: रणथंभौर दिल्ली सल्तनत के अधीन आया।

77. चित्तौड़गढ़ का युद्ध (1303 ई.)

पक्ष: राणा रतन सिंह बनाम अलाउद्दीन खिलजी

चित्तौड़ का किला मेवाड़ की शक्ति का प्रतीक था। युद्ध के बाद व्यापक जौहर और शाका की घटनाएँ हुईं।

विजेता: अलाउद्दीन खिलजी
परिणाम: चित्तौड़ पर सल्तनत का नियंत्रण स्थापित हुआ।

78. मालवा अभियान (1305 ई.)

पक्ष: अलाउद्दीन खिलजी बनाम परमार वंश

मालवा रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र था।

विजेता: दिल्ली सल्तनत

79. अमरोहा का युद्ध (1305 ई.)

पक्ष: मंगोल सेना बनाम दिल्ली सल्तनत

यह मंगोलों के विरुद्ध सबसे निर्णायक युद्धों में से एक था।

विजेता: दिल्ली सल्तनत
परिणाम: मंगोलों की भारी पराजय।

80. सिवाना का युद्ध (1308 ई.)

पक्ष: शीतलदेव बनाम अलाउद्दीन खिलजी

राजस्थान के सिवाना दुर्ग पर कब्जे के लिए संघर्ष हुआ।

विजेता: अलाउद्दीन खिलजी

81. जालौर का युद्ध (1311 ई.)

पक्ष: कान्हड़देव बनाम अलाउद्दीन खिलजी

जालौर राजपूत प्रतिरोध का अंतिम प्रमुख केंद्र था।

विजेता: अलाउद्दीन खिलजी

82. वारंगल अभियान (1309 ई.)

पक्ष: मलिक काफूर बनाम काकतीय वंश

दक्षिण भारत में दिल्ली सल्तनत का पहला बड़ा अभियान।

विजेता: मलिक काफूर
परिणाम: काकतीय शासक ने अधीनता स्वीकार की।

83. द्वारसमुद्र अभियान (1310 ई.)

पक्ष: मलिक काफूर बनाम होयसला वंश

होयसला राज्य को दिल्ली सल्तनत की शक्ति स्वीकार करनी पड़ी।

विजेता: दिल्ली सल्तनत

84. मदुरै अभियान (1311 ई.)

पक्ष: मलिक काफूर बनाम पांड्य वंश

यह दक्षिण भारत का सबसे सफल खिलजी अभियान माना जाता है।

विजेता: दिल्ली सल्तनत
परिणाम: भारी धन-संपत्ति प्राप्त हुई।

85. देवगिरि पुनर्विजय (1313 ई.)

पक्ष: दिल्ली सल्तनत बनाम यादव वंश

यादवों के विद्रोह के बाद देवगिरि पर पुनः अधिकार किया गया।

विजेता: दिल्ली सल्तनत

86. मंगोल आक्रमण विफल (1313 ई.)

पक्ष: मंगोल बनाम दिल्ली सल्तनत

अलाउद्दीन की मजबूत सैन्य व्यवस्था के कारण मंगोल सफल नहीं हो सके।

विजेता: दिल्ली सल्तनत

87. खुसरो खान विद्रोह (1316 ई.)

पक्ष: खुसरो खान बनाम खिलजी शासन

अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई।

परिणाम: खिलजी सत्ता कमजोर हुई।

88. मुबारक शाह का सत्ता संघर्ष

काल: 1316–1320 ई.

अलाउद्दीन के उत्तराधिकारियों के बीच लगातार संघर्ष हुए।

परिणाम: केंद्रीय सत्ता कमजोर हुई।

89. गाजी मलिक का अभियान (1320 ई.)

पक्ष: गाजी मलिक बनाम खुसरो खान

गाजी मलिक ने खुसरो खान को चुनौती दी।

विजेता: गाजी मलिक

90. तुगलक वंश की स्थापना (1320 ई.)

घटना: गयासुद्दीन तुगलक का राज्यारोहण

खिलजी वंश के अंत के बाद तुगलक वंश की स्थापना हुई।

परिणाम: दिल्ली सल्तनत के नए युग की शुरुआत।

91. वारंगल विजय अभियान (1323 ई.)

पक्ष: उलुग खान (मुहम्मद बिन तुगलक) बनाम काकतीय वंश

गयासुद्दीन तुगलक ने अपने पुत्र उलुग खान को दक्षिण भारत भेजा। वारंगल पर कई अभियानों के बाद दिल्ली सल्तनत का अधिकार स्थापित हुआ।

विजेता: दिल्ली सल्तनत
परिणाम: काकतीय साम्राज्य का अंत।

92. जाजनगर (उड़ीसा) अभियान

काल: 1324 ई.

तुगलक सेना ने उड़ीसा क्षेत्र में सैन्य अभियान चलाया।

विजेता: दिल्ली सल्तनत

93. बंगाल अभियान (1324 ई.)

पक्ष: गयासुद्दीन तुगलक बनाम बंगाल शासक

बंगाल लंबे समय से स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहा था।

विजेता: दिल्ली सल्तनत

94. मुहम्मद बिन तुगलक का दक्षिणी विस्तार अभियान

काल: 1325–1335 ई.

मुहम्मद बिन तुगलक ने दक्षिण भारत पर प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया।

परिणाम: प्रारंभिक सफलता लेकिन बाद में व्यापक विद्रोह।

95. माबार (मदुरै) विद्रोह

काल: 1335 ई.

दक्षिण भारत के क्षेत्रों ने दिल्ली से स्वतंत्रता की घोषणा कर दी।

परिणाम: मदुरै सल्तनत का उदय।

96. बंगाल विद्रोह (1338 ई.)

पक्ष: बंगाल के शासक बनाम दिल्ली सल्तनत

मुहम्मद बिन तुगलक बंगाल को स्थायी रूप से नियंत्रित नहीं रख सका।

परिणाम: बंगाल स्वतंत्र हुआ।

97. विजयनगर साम्राज्य का उदय (1336 ई.)

संस्थापक: हरिहर और बुक्का

दक्षिण भारत में हिंदू शक्ति के रूप में विजयनगर साम्राज्य का उदय हुआ।

परिणाम: दक्षिण भारत में नई राजनीतिक शक्ति का उदय।

98. बहमनी सल्तनत की स्थापना (1347 ई.)

पक्ष: अलाउद्दीन बहमन शाह बनाम दिल्ली सल्तनत

दक्षिण भारत में बहमनी सल्तनत स्वतंत्र हो गई।

परिणाम: दक्कन में स्वतंत्र मुस्लिम राज्य की स्थापना।

99. गुजरात विद्रोह

काल: मुहम्मद बिन तुगलक काल

उच्च कर और प्रशासनिक समस्याओं के कारण गुजरात में विद्रोह हुआ।

परिणाम: सल्तनत कमजोर हुई।

100. सिंध अभियान

काल: 1351 ई.

मुहम्मद बिन तुगलक विद्रोह दबाने के लिए सिंध पहुँचा।

परिणाम: अभियान के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

101. फिरोज शाह तुगलक का बंगाल अभियान (1353 ई.)

पक्ष: दिल्ली सल्तनत बनाम बंगाल

फिरोज शाह ने बंगाल को पुनः अधीन करने का प्रयास किया।

परिणाम: पूर्ण सफलता नहीं मिली।

102. दूसरा बंगाल अभियान (1359 ई.)

पक्ष: फिरोज शाह तुगलक बनाम बंगाल सल्तनत

फिरोज शाह ने पुनः बंगाल पर अभियान चलाया।

परिणाम: बंगाल स्वतंत्र बना रहा।

103. जाजनगर अभियान (1360 ई.)

स्थान: उड़ीसा

फिरोज शाह ने उड़ीसा पर सैन्य अभियान चलाया।

विजेता: दिल्ली सल्तनत

104. नागरकोट अभियान (1361 ई.)

स्थान: हिमाचल क्षेत्र

नागरकोट दुर्ग उत्तर भारत का प्रमुख किला था।

विजेता: फिरोज शाह तुगलक

105. सिंध अभियान (1363 ई.)

पक्ष: फिरोज शाह बनाम सिंध शासक

सिंध में दिल्ली की शक्ति पुनः स्थापित करने का प्रयास किया गया।

विजेता: दिल्ली सल्तनत

106. बहमनी-विजयनगर संघर्ष की शुरुआत

काल: 14वीं शताब्दी

तुंगभद्रा दोआब क्षेत्र को लेकर दोनों शक्तियों में लगातार संघर्ष प्रारंभ हुआ।

परिणाम: दक्षिण भारत में दीर्घकालिक युद्धों की शुरुआत।

107. तुगलक उत्तराधिकार संघर्ष (1388 ई.)

घटना: फिरोज शाह की मृत्यु के बाद संघर्ष

केंद्रीय सत्ता कमजोर होने लगी।

परिणाम: अनेक दावेदारों के बीच युद्ध।

108. दिल्ली गृहयुद्ध (1389–1394 ई.)

पक्ष: विभिन्न तुगलक दावेदार

दिल्ली सल्तनत कई हिस्सों में विभाजित होने लगी।

परिणाम: प्रशासनिक पतन।

109. पंजाब संघर्ष

काल: 1390 का दशक

सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार विद्रोह और संघर्ष हुए।

परिणाम: सल्तनत की शक्ति कम हुई।

110. तैमूर का भारत अभियान (1398 ई.)

पक्ष: तैमूर बनाम दिल्ली सल्तनत

मध्य एशिया का विजेता तैमूर विशाल सेना लेकर भारत आया।

विजेता: तैमूर

111. तलंबा का युद्ध (1398 ई.)

स्थान: पंजाब

तैमूर ने भारत में प्रवेश करते समय कई नगरों को जीत लिया।

विजेता: तैमूर

112. दिल्ली का युद्ध (1398 ई.)

पक्ष: नासिरुद्दीन महमूद तुगलक बनाम तैमूर

दिल्ली के निकट निर्णायक युद्ध हुआ।

विजेता: तैमूर
परिणाम: दिल्ली में भारी विनाश और लूटपाट।

113. मेरठ अभियान (1399 ई.)

पक्ष: तैमूर बनाम स्थानीय प्रतिरोध

दिल्ली से लौटते समय तैमूर ने कई नगरों पर आक्रमण किया।

विजेता: तैमूर

114. हरिद्वार क्षेत्र संघर्ष

काल: 1399 ई.

तैमूर की सेना और स्थानीय शक्तियों के बीच कई छोटे युद्ध हुए।

विजेता: तैमूर

115. तुगलक वंश का पतन (1414 ई.)

घटना: तुगलक शासन का अंत

तैमूर के आक्रमण और आंतरिक संघर्षों के कारण तुगलक सत्ता समाप्त हो गई।

परिणाम: सैयद वंश के उदय का मार्ग प्रशस्त हुआ।

116. सैयद वंश की स्थापना (1414 ई.)

पक्ष: खिज्र खान बनाम तुगलक अवशेष शक्ति

तैमूर के आक्रमण के बाद दिल्ली की सत्ता कमजोर हो चुकी थी। खिज्र खान ने दिल्ली पर अधिकार कर सैयद वंश की स्थापना की।

विजेता: खिज्र खान
परिणाम: सैयद वंश की शुरुआत।

117. दोआब विद्रोह दमन अभियान

काल: 1414–1421 ई.

गंगा-यमुना दोआब में अनेक स्थानीय सरदारों ने विद्रोह कर दिया।

विजेता: सैयद शासक

118. कटेहर अभियान

स्थान: रोहिलखंड क्षेत्र

दिल्ली सल्तनत की सत्ता पुनः स्थापित करने के लिए अभियान चलाया गया।

परिणाम: सीमित सफलता।

119. जौनपुर संघर्ष

पक्ष: दिल्ली सल्तनत बनाम शर्की वंश

जौनपुर सल्तनत उत्तर भारत की एक शक्तिशाली स्वतंत्र शक्ति बन चुकी थी।

परिणाम: लंबे समय तक संघर्ष जारी रहा।

120. मालवा संघर्ष

काल: 15वीं शताब्दी

दिल्ली, मालवा और जौनपुर के बीच प्रभुत्व के लिए संघर्ष हुआ।

परिणाम: क्षेत्रीय राज्यों का उदय।

121. बहलोल लोदी का उदय (1451 ई.)

पक्ष: बहलोल लोदी बनाम सैयद वंश

सैयद वंश की कमजोरी का लाभ उठाकर बहलोल लोदी ने सत्ता प्राप्त की।

विजेता: बहलोल लोदी
परिणाम: लोदी वंश की स्थापना।

122. जौनपुर विजय अभियान (1479 ई.)

पक्ष: बहलोल लोदी बनाम शर्की वंश

उत्तर भारत की सत्ता के लिए निर्णायक संघर्ष हुआ।

विजेता: बहलोल लोदी
परिणाम: जौनपुर दिल्ली सल्तनत में शामिल हुआ।

123. ग्वालियर अभियान

काल: लोदी शासन

ग्वालियर का किला मध्य भारत की राजनीति में महत्वपूर्ण था।

परिणाम: लोदी प्रभाव बढ़ा।

124. धौलपुर संघर्ष

पक्ष: लोदी शासक बनाम स्थानीय राजपूत

राजपूत शक्तियों और लोदी शासन के बीच कई संघर्ष हुए।

परिणाम: सीमित सफलता।

125. सिकंदर लोदी के राजपूत अभियान

काल: 1489–1517 ई.

सिकंदर लोदी ने राजस्थान और मध्य भारत में कई सैन्य अभियान चलाए।

विजेता: सिकंदर लोदी

126. बिहार विजय अभियान

पक्ष: सिकंदर लोदी बनाम स्थानीय शासक

बिहार पर नियंत्रण मजबूत किया गया।

विजेता: सिकंदर लोदी

127. नागौर संघर्ष

स्थान: राजस्थान

राजस्थान के विभिन्न राज्यों में सत्ता संघर्ष जारी रहे।

परिणाम: क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव।

128. बहमनी–विजयनगर संघर्ष (प्रारंभिक चरण)

स्थान: तुंगभद्रा दोआब

दोनों शक्तियाँ उपजाऊ भूमि और व्यापारिक मार्गों पर अधिकार चाहती थीं।

परिणाम: लगातार युद्धों की शुरुआत।

129. रायचूर दोआब का प्रथम युद्ध

पक्ष: विजयनगर बनाम बहमनी सल्तनत

रायचूर क्षेत्र दक्षिण भारत का सबसे विवादित क्षेत्र था।

परिणाम: कोई स्थायी विजेता नहीं।

130. रायचूर दोआब का द्वितीय संघर्ष

काल: 15वीं शताब्दी

दोनों पक्षों ने बार-बार क्षेत्र पर कब्ज़ा करने का प्रयास किया।

परिणाम: संघर्ष जारी रहा।

131. उड़ीसा-विजयनगर संघर्ष

पक्ष: गजपति शासक बनाम विजयनगर

पूर्वी तट पर प्रभुत्व के लिए युद्ध हुए।

परिणाम: क्षेत्रीय नियंत्रण में परिवर्तन।

132. कृष्णदेवराय का उदय (1509 ई.)

घटना: विजयनगर का स्वर्णकाल

कृष्णदेवराय दक्षिण भारत के सबसे महान शासकों में से एक थे।

परिणाम: विजयनगर की शक्ति चरम पर पहुँची।

133. उम्मत्तूर अभियान

पक्ष: कृष्णदेवराय बनाम उम्मत्तूर नायक

कृष्णदेवराय ने दक्षिणी क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में लिया।

विजेता: कृष्णदेवराय

134. बीजापुर संघर्ष

पक्ष: विजयनगर बनाम आदिलशाही

दक्कन के मुस्लिम राज्यों और विजयनगर के बीच संघर्ष बढ़ने लगा।

परिणाम: आगे बड़े युद्धों की भूमिका बनी।

135. गुलबर्गा अभियान

काल: कृष्णदेवराय काल

विजयनगर सेना ने बहमनी क्षेत्रों में सैन्य दबाव बढ़ाया।

विजेता: विजयनगर

136. रायचूर का महान युद्ध (1520 ई.)

पक्ष: कृष्णदेवराय बनाम बीजापुर सल्तनत

यह विजयनगर इतिहास की सबसे प्रसिद्ध सैन्य विजय मानी जाती है।

विजेता: कृष्णदेवराय
परिणाम: रायचूर दोआब पर विजयनगर का नियंत्रण।

137. पंजाब में बाबर का प्रथम अभियान (1519 ई.)

पक्ष: बाबर बनाम स्थानीय अफगान सरदार

बाबर ने भारत में कई प्रारंभिक आक्रमण किए।

विजेता: बाबर

138. भेरा अभियान

काल: 1519 ई.

पंजाब क्षेत्र में बाबर की शक्ति बढ़ी।

विजेता: बाबर

139. सियालकोट विजय

काल: 1520 ई.

बाबर ने उत्तर-पश्चिम भारत में अपनी स्थिति मजबूत की।

विजेता: बाबर

140. कंधार संघर्ष

पक्ष: बाबर बनाम स्थानीय शासक

भारत पर स्थायी आक्रमण से पहले बाबर ने कंधार को सुरक्षित किया।

विजेता: बाबर

141. लाहौर विजय (1524 ई.)

पक्ष: बाबर बनाम लोदी समर्थक

बाबर ने लाहौर पर अधिकार कर लिया।

विजेता: बाबर

142. दीपालपुर अभियान

काल: 1524 ई.

बाबर ने पंजाब में अपना आधार मजबूत किया।

विजेता: बाबर

143. दौलत खान लोदी विद्रोह

पक्ष: इब्राहिम लोदी बनाम दौलत खान

लोदी साम्राज्य के भीतर असंतोष बढ़ गया।

परिणाम: बाबर को भारत आने का अवसर मिला।

144. राणा सांगा का विस्तार अभियान

पक्ष: मेवाड़ बनाम मालवा एवं गुजरात

राणा सांगा ने राजपूत शक्ति को चरम पर पहुँचाया।

विजेता: राणा सांगा

145. प्रथम पानीपत युद्ध की तैयारी (1525-1526 ई.)

पक्ष: बाबर बनाम इब्राहिम लोदी

दोनों पक्ष निर्णायक संघर्ष की तैयारी कर रहे थे। यह युद्ध मध्यकालीन भारत के अंत और मुगल युग की शुरुआत का संकेत था।

परिणाम: प्रथम पानीपत युद्ध (1526) की भूमिका तैयार हुई।

146. प्रथम पानीपत का युद्ध (21 अप्रैल 1526)

स्थान: पानीपत, हरियाणा
पक्ष: बाबर बनाम इब्राहिम लोदी

यह भारत के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण युद्धों में से एक था। बाबर ने तोपखाने, घुड़सवार सेना और 'तुलुगमा' युद्ध नीति का प्रयोग किया।

इब्राहिम लोदी की सेना संख्या में अधिक थी, लेकिन आधुनिक युद्ध तकनीक के सामने टिक नहीं सकी।

विजेता: बाबर
परिणाम: दिल्ली सल्तनत का अंत हुआ और भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना हुई।

147. खानवा का युद्ध (1527)

स्थान: खानवा, राजस्थान
पक्ष: बाबर बनाम राणा सांगा

राणा सांगा ने विभिन्न राजपूत राज्यों को एकजुट कर बाबर को चुनौती दी।

युद्ध अत्यंत भीषण था और कई दिनों तक चला।

विजेता: बाबर
परिणाम: उत्तर भारत में मुगल सत्ता मजबूत हुई और राजपूत संघ की शक्ति को बड़ा आघात पहुँचा।

148. चंदेरी का युद्ध (1528)

पक्ष: बाबर बनाम मेदिनी राय

मेदिनी राय राणा सांगा के सहयोगी थे।

विजेता: बाबर
परिणाम: मध्य भारत में मुगल प्रभाव बढ़ा।

149. घाघरा का युद्ध (1529)

स्थान: बिहार
पक्ष: बाबर बनाम अफगान सरदार एवं बंगाल

बाबर ने अफगान शक्तियों को निर्णायक रूप से पराजित किया।

विजेता: बाबर
परिणाम: उत्तर भारत में मुगल प्रभुत्व स्थापित हुआ।

150. गुजरात अभियान (1535)

पक्ष: हुमायूँ बनाम बहादुर शाह

हुमायूँ ने गुजरात के शक्तिशाली शासक बहादुर शाह के विरुद्ध अभियान चलाया।

विजेता: हुमायूँ

151. चौसा का युद्ध (1539)

स्थान: बिहार
पक्ष: शेरशाह सूरी बनाम हुमायूँ

शेरशाह ने रणनीतिक कौशल से हुमायूँ को पराजित कर दिया।

विजेता: शेरशाह सूरी
परिणाम: मुगल सत्ता संकट में पड़ गई।

152. कन्नौज / बिलग्राम का युद्ध (1540)

पक्ष: शेरशाह सूरी बनाम हुमायूँ

यह युद्ध हुमायूँ की सत्ता के लिए निर्णायक सिद्ध हुआ।

विजेता: शेरशाह सूरी
परिणाम: हुमायूँ भारत छोड़ने को मजबूर हुआ। सूरी साम्राज्य की स्थापना हुई।

153. कालिंजर अभियान (1545)

पक्ष: शेरशाह सूरी बनाम चंदेल शासक

कालिंजर दुर्ग की घेराबंदी के दौरान बारूद विस्फोट में शेरशाह घायल हुआ।

विजेता: शेरशाह सूरी
परिणाम: कालिंजर जीता गया, लेकिन शेरशाह की मृत्यु हो गई।

154. सरहिंद का युद्ध (1555)

पक्ष: हुमायूँ बनाम सिकंदर सूरी

हुमायूँ ने निर्वासन से लौटकर पुनः भारत पर अधिकार स्थापित किया।

विजेता: हुमायूँ
परिणाम: मुगल सत्ता की पुनर्स्थापना।

155. द्वितीय पानीपत का युद्ध (1556)

स्थान: पानीपत
पक्ष: अकबर एवं बैरम खाँ बनाम हेमू

हेमू ने दिल्ली पर अधिकार कर लिया था और स्वयं को सम्राट घोषित किया।

युद्ध में हेमू घायल हो गया जिससे सेना का मनोबल टूट गया।

विजेता: अकबर
परिणाम: भारत में मुगल सत्ता स्थायी रूप से स्थापित हो गई।

156. मालवा विजय (1561)

पक्ष: अकबर बनाम बाज बहादुर

मालवा पर मुगल नियंत्रण स्थापित हुआ।

विजेता: अकबर

157. गोंडवाना युद्ध (1564)

पक्ष: अकबर बनाम रानी दुर्गावती

रानी दुर्गावती ने वीरतापूर्वक मुगल सेना का सामना किया।

विजेता: मुगल सेना
परिणाम: गोंडवाना पर मुगल प्रभाव बढ़ा।

158. चित्तौड़गढ़ अभियान (1567-68)

पक्ष: अकबर बनाम मेवाड़

चित्तौड़ दुर्ग पर लंबी घेराबंदी के बाद मुगलों ने विजय प्राप्त की।

विजेता: अकबर

159. रणथंभौर विजय (1569)

पक्ष: अकबर बनाम राजपूत शासक

रणथंभौर का किला मुगल साम्राज्य में शामिल हुआ।

विजेता: अकबर

160. गुजरात विजय अभियान (1572-73)

पक्ष: अकबर बनाम गुजरात सल्तनत

गुजरात के व्यापारिक बंदरगाहों पर नियंत्रण प्राप्त हुआ।

विजेता: अकबर

161. तुकरोई का युद्ध (1575)

पक्ष: अकबर बनाम बंगाल सल्तनत

बंगाल पर अधिकार के लिए निर्णायक युद्ध।

विजेता: मुगल साम्राज्य

162. राजमहल का युद्ध (1576)

पक्ष: अकबर बनाम दाऊद खान कर्रानी

बंगाल सल्तनत का अंतिम पतन।

विजेता: मुगल साम्राज्य

163. हल्दीघाटी का युद्ध (18 जून 1576)

स्थान: हल्दीघाटी, राजस्थान
पक्ष: महाराणा प्रताप बनाम मुगल सेना

भारतीय इतिहास का अत्यंत प्रसिद्ध युद्ध। महाराणा प्रताप ने सीमित संसाधनों के बावजूद अद्भुत वीरता दिखाई।

सामरिक परिणाम: मुगल सेना को युद्धक्षेत्र पर बढ़त मिली
दीर्घकालिक परिणाम: महाराणा प्रताप ने संघर्ष जारी रखा और मेवाड़ के बड़े भाग पुनः प्राप्त किए।

164. देवर का युद्ध (1582)

पक्ष: महाराणा प्रताप बनाम मुगल चौकियाँ

इसे कई इतिहासकार मेवाड़ की पुनर्विजय का महत्वपूर्ण चरण मानते हैं।

विजेता: महाराणा प्रताप
परिणाम: मेवाड़ के अनेक क्षेत्रों पर पुनः अधिकार।

165. काबुल अभियान (1581)

पक्ष: अकबर बनाम मिर्जा हाकिम
विजेता: अकबर

166. कश्मीर विजय (1586)

पक्ष: अकबर बनाम कश्मीर शासक
विजेता: मुगल साम्राज्य

167. सिंध विजय (1591)

पक्ष: अकबर बनाम स्थानीय अमीर
विजेता: मुगल साम्राज्य

168. बलूचिस्तान अभियान (1595)

पक्ष: अकबर बनाम स्थानीय सरदार
विजेता: मुगल साम्राज्य

169. कंधार विजय (1595)

पक्ष: अकबर बनाम फारसी प्रभाव
विजेता: मुगल साम्राज्य

170. अहमदनगर अभियान (1595)

पक्ष: मुगल सेना बनाम चाँद बीबी

चाँद बीबी ने असाधारण साहस के साथ मुगलों का सामना किया।

परिणाम: संघर्ष जारी रहा।

171. सोनपेट का संघर्ष

काल: दक्कन अभियान
परिणाम: मुगल प्रभाव में वृद्धि।

172. अहमदनगर का पतन (1600)

पक्ष: मुगल साम्राज्य बनाम निजामशाही
विजेता: मुगल साम्राज्य

173. असीरगढ़ का युद्ध (1601)

पक्ष: अकबर बनाम खानदेश
विजेता: अकबर

174. दक्कन नियंत्रण अभियान

काल: 1601-1605
परिणाम: दक्षिण में मुगल प्रभाव बढ़ा।

175. अकबर काल का अंतिम सैन्य चरण (1605)

घटना: अकबर की मृत्यु

अकबर के समय तक मुगल साम्राज्य भारत की सबसे बड़ी शक्ति बन चुका था।

परिणाम: जहाँगीर के शासनकाल की शुरुआत।

176. मेवाड़-मुगल संघर्ष का अंतिम चरण (1605–1615)

पक्ष: महाराणा अमर सिंह प्रथम बनाम मुगल साम्राज्य

महाराणा प्रताप की मृत्यु के बाद भी मेवाड़ और मुगलों के बीच संघर्ष जारी रहा। जहाँगीर ने कई सैन्य अभियान भेजे।

परिणाम: 1615 ई. में संधि हुई। मेवाड़ ने सीमित शर्तों पर मुगल प्रभुत्व स्वीकार किया।

177. कांगड़ा दुर्ग अभियान (1620)

पक्ष: जहाँगीर बनाम कांगड़ा राज्य

कांगड़ा का दुर्ग हिमालय क्षेत्र का अत्यंत शक्तिशाली किला था।

विजेता: मुगल साम्राज्य

178. अहमदनगर संघर्ष (1608–1626)

पक्ष: मुगल साम्राज्य बनाम मलिक अंबर

मलिक अंबर ने गुरिल्ला युद्ध पद्धति से मुगलों को लंबे समय तक चुनौती दी।

परिणाम: दक्कन में मुगलों को अपेक्षित सफलता देर से मिली।

179. शाहजहाँ का दक्कन अभियान (1629–1636)

पक्ष: मुगल साम्राज्य बनाम अहमदनगर
विजेता: मुगल साम्राज्य
परिणाम: अहमदनगर राज्य का प्रभाव समाप्त हो गया।

180. बुंदेला विद्रोह (1635)

पक्ष: जुझार सिंह बुंदेला बनाम शाहजहाँ
विजेता: मुगल साम्राज्य

181. कंधार पुनर्विजय अभियान (1638)

पक्ष: मुगल साम्राज्य बनाम फारस
विजेता: मुगल साम्राज्य

182. कंधार का युद्ध (1649)

पक्ष: सफ़वीद फारस बनाम मुगल साम्राज्य

फारस ने कंधार पर कब्ज़ा कर लिया।

विजेता: सफ़वीद साम्राज्य
परिणाम: मुगलों को बड़ा रणनीतिक नुकसान।

183. कंधार पुनः प्राप्ति अभियान (1652)

पक्ष: औरंगज़ेब के नेतृत्व में मुगल सेना
परिणाम: असफल अभियान।

184. कंधार पुनः प्राप्ति का अंतिम प्रयास (1653)

पक्ष: दारा शिकोह बनाम फारसी सेना
परिणाम: कंधार स्थायी रूप से मुगलों के हाथ से निकल गया।

185. मुगल उत्तराधिकार युद्ध (1657–1658)

पक्ष: दारा शिकोह, औरंगज़ेब, शुजा, मुराद

शाहजहाँ की बीमारी के बाद चारों राजकुमारों के बीच सत्ता संघर्ष शुरू हुआ।

परिणाम: औरंगज़ेब सबसे शक्तिशाली दावेदार बनकर उभरा।

186. धर्मत का युद्ध (1658)

पक्ष: औरंगज़ेब बनाम जसवंत सिंह
विजेता: औरंगज़ेब

187. सामूगढ़ का युद्ध (1658)

पक्ष: औरंगज़ेब बनाम दारा शिकोह

मुगल उत्तराधिकार युद्ध का निर्णायक संघर्ष।

विजेता: औरंगज़ेब
परिणाम: दिल्ली की सत्ता पर नियंत्रण।

188. खजुवा का युद्ध (1659)

पक्ष: औरंगज़ेब बनाम शाह शुजा
विजेता: औरंगज़ेब

189. देवराई का युद्ध (1659)

पक्ष: औरंगज़ेब बनाम दारा शिकोह
विजेता: औरंगज़ेब

190. शिवाजी का उदय (1645–1660)

पक्ष: मराठा शक्ति बनाम बीजापुर

शिवाजी ने पश्चिमी भारत में स्वतंत्र मराठा शक्ति का निर्माण शुरू किया।

परिणाम: मराठा साम्राज्य की नींव रखी गई।

191. प्रतापगढ़ का युद्ध (1659)

पक्ष: शिवाजी बनाम अफ़ज़ल खान

मराठा इतिहास का अत्यंत प्रसिद्ध युद्ध।

विजेता: शिवाजी महाराज
परिणाम: मराठा शक्ति तेजी से बढ़ी।

192. पन्हाला संघर्ष (1660)

पक्ष: शिवाजी बनाम सिद्दी जौहर
परिणाम: शिवाजी सुरक्षित निकलने में सफल रहे।

193. पावनखिंड का युद्ध (1660)

पक्ष: बाजी प्रभु देशपांडे बनाम बीजापुर सेना
विजेता: सामरिक रूप से बीजापुर, लेकिन रणनीतिक रूप से मराठा सफल

194. शाइस्ता खान अभियान (1663)

पक्ष: शिवाजी बनाम मुगल सेना
विजेता: शिवाजी
परिणाम: मुगल प्रतिष्ठा को बड़ा झटका।

195. सूरत अभियान (1664)

पक्ष: शिवाजी बनाम मुगल प्रशासन
विजेता: शिवाजी

196. पुरंदर का युद्ध (1665)

पक्ष: जयसिंह प्रथम बनाम शिवाजी
विजेता: मुगल सेना
परिणाम: पुरंदर की संधि।

197. आगरा प्रकरण (1666)

पक्ष: शिवाजी एवं औरंगज़ेब
परिणाम: शिवाजी आगरा से निकलने में सफल रहे।

198. सिंहगढ़ का युद्ध (1670)

पक्ष: तानाजी मालुसरे बनाम मुगल सेना

मराठा इतिहास के सबसे वीरतापूर्ण युद्धों में से एक।

विजेता: मराठा सेना

199. दूसरी सूरत लूट (1670)

पक्ष: शिवाजी बनाम मुगल प्रशासन
विजेता: मराठा सेना

200. साल्हेर का युद्ध (1672)

पक्ष: मराठा बनाम मुगल

खुले मैदान में मराठों की सबसे बड़ी जीतों में से एक।

विजेता: मराठा साम्राज्य

201. शिवाजी का राज्याभिषेक (1674)

घटना: रायगढ़
परिणाम: मराठा साम्राज्य की औपचारिक स्थापना।

202. कर्नाटक अभियान (1676–1678)

पक्ष: शिवाजी बनाम दक्षिणी राज्य
विजेता: शिवाजी

203. शिवाजी की मृत्यु (1680)

घटना: मराठा उत्तराधिकार
परिणाम: संभाजी शासक बने।

204. औरंगज़ेब का दक्कन अभियान (1681)

पक्ष: मुगल साम्राज्य बनाम मराठा शक्ति
परिणाम: 27 वर्षों तक चलने वाले युद्धों की शुरुआत।

205. रामसेज दुर्ग संघर्ष (1682–1688)

पक्ष: मराठा बनाम मुगल
परिणाम: मराठों का दीर्घ प्रतिरोध।

206. बीजापुर विजय (1686)

पक्ष: औरंगज़ेब बनाम आदिलशाही
विजेता: औरंगज़ेब
परिणाम: बीजापुर सल्तनत का अंत।

207. गोलकुंडा विजय (1687)

पक्ष: औरंगज़ेब बनाम कुतुबशाही
विजेता: औरंगज़ेब
परिणाम: गोलकुंडा सल्तनत का अंत।

208. संभाजी की गिरफ्तारी (1689)

पक्ष: मुगल सेना बनाम संभाजी
विजेता: मुगल सेना

209. रायगढ़ अभियान (1689)

पक्ष: मुगल बनाम मराठा
विजेता: मुगल सेना

210. जिन्जी की घेराबंदी (1690–1698)

पक्ष: औरंगज़ेब बनाम राजाराम
परिणाम: लंबा युद्ध, मराठा प्रतिरोध जारी रहा।

211. संताजी घोरपड़े अभियान

काल: 1690 का दशक
परिणाम: मुगलों को लगातार क्षति।

212. धनाजी जाधव अभियान

पक्ष: मराठा बनाम मुगल
परिणाम: गुरिल्ला युद्ध में मराठा सफलता।

213. सतारा संघर्ष

काल: 1700
परिणाम: युद्ध जारी रहा।

214. पन्हाला पुनः संघर्ष

काल: 1701
परिणाम: मराठा प्रतिरोध जारी।

215. तोरणा अभियान

काल: 1704
परिणाम: मराठों का पुनर्गठन।

216. वाघिनखेड़ा युद्ध (1705)

पक्ष: मुगल बनाम मराठा
परिणाम: निर्णायक सफलता नहीं।

217. अहमदनगर क्षेत्र संघर्ष

काल: 1706
परिणाम: मुगल थकान बढ़ी।

218. औरंगज़ेब का अंतिम अभियान (1707)

स्थान: दक्कन
परिणाम: दीर्घ युद्ध के बाद भी मराठों को पूरी तरह दबाया नहीं जा सका।

219. औरंगज़ेब की मृत्यु (1707)

घटना: अहमदनगर
परिणाम: मुगल साम्राज्य के पतन का चरण प्रारंभ।

220. मुगल उत्तराधिकार युद्ध (1707)

पक्ष: बहादुर शाह प्रथम बनाम अन्य राजकुमार
विजेता: बहादुर शाह प्रथम
परिणाम: मुगल सत्ता बनी रही, लेकिन साम्राज्य कमजोर होने लगा।

❓ Frequently Asked Questions (FAQ)

भारत का पहला प्रमुख युद्ध कौन सा माना जाता है?

वैदिक और पौराणिक परंपराओं में दशराज्ञ युद्ध तथा महाभारत युद्ध को प्राचीन भारत के प्रमुख युद्धों में गिना जाता है।

भारत का सबसे प्रसिद्ध युद्ध कौन सा है?

पानीपत के तीनों युद्ध, हल्दीघाटी का युद्ध, खानवा का युद्ध और प्लासी का युद्ध भारतीय इतिहास के सबसे प्रसिद्ध युद्धों में शामिल हैं।

पानीपत का प्रथम युद्ध कब हुआ था?

प्रथम पानीपत का युद्ध 21 अप्रैल 1526 को बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच लड़ा गया था।

हल्दीघाटी का युद्ध किसके बीच हुआ था?

हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को महाराणा प्रताप और मुगल सेना (मान सिंह के नेतृत्व में) के बीच हुआ था।

भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना किस युद्ध के बाद हुई?

प्रथम पानीपत युद्ध (1526) के बाद भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना हुई।

प्लासी का युद्ध कब हुआ था?

प्लासी का युद्ध 23 जून 1757 को अंग्रेजों और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच लड़ा गया था।

तीसरा पानीपत युद्ध कब हुआ था?

तीसरा पानीपत युद्ध 14 जनवरी 1761 को मराठों और अहमद शाह अब्दाली के बीच लड़ा गया था।

यह युद्ध श्रृंखला किन परीक्षाओं के लिए उपयोगी है?

SSC, Railway, UPSC, BPSC, JPSC, JSSC, State PCS, CDS, NDA तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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