झारखंड नदी घाटी परियोजनाएं: JSSC/JPSC परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर और नोट्स
1. झारखंड की प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं
झारखंड के नदी घाटी परियोजना टॉपिक से अब तक परिक्षाओं में जो पूछे गए हैं/पीछे जा सकते हैं। उसी को ध्यान में रखते हुए जो प्वाइंट और जितने प्वाइंट महत्वपूर्ण है। उन्हीं प्वाइंट्स को नीचे वर्णित किया जा रहा है।
(A) दामोदर घाटी परियोजना (DVC)
- स्थापना:🪷 दामोदर नदी घाटी परियोजना,भारत की प्रथम बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसकी स्थापना 7 जुलाई 1948 को की गई थी। 🪷 झारखंड और पश्चिम बंगाल मुख्यत, इस नदी घाटी परियोजना से लाभान्वित राज्य हैं। (।
- –: प्रमुख बांध और जलविद्युत गृह :–
🪷 इस नदी घाटी परियोजना के तहत 8 प्रमुख डैम और 3 जलविद्युत गृह का निर्माण, या तो दामोदर नदी पर या इनकी सहायक नदियों पर किया गया है।
- (क) तिलैया बांध:– इस डैम का निर्माण कोडरमा जिले में बराकर नदी पर 21 फरवरी 1953 को किया गया था।इस डैम से 4 मेगावाट तक की बिजली उत्पादन की जाती है।
- (ख)मैथन बांध:– यह बांध( झारखंड राज्य का सबसे बड़ा बांध, ऊंचाई - 165 फीट, 1958 में स्थापित) धनबाद जिले में बराकर नदी पर स्थित है। इस बांध में भूमिगत बिजली स्टेशन बनाई हुई है, जो पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में पहला भूमिगत बिजली स्टेशन है। 🪷इस भूमिगत बिजली स्टेशन की लगभग 60 हजार किलोवाट( झारखंड सरकार की ऑफिसियल डेटा) की विद्युत उत्पादन की क्षमता है।।
- (ग) पंचेत बांध:– यह बांध धनबाद जिले के दामोदर नदी और बराकर नदी के संगम पर 1959 ई को स्थापित किया गया है। पंचेत बांध के उतर दिशा से धनबाद जिला और दक्षिण से पुरुलिया जिला से घिरा हुआ है। ।
- (घ) तेनुघाट डैम :– तेनुघाट डैम( स्थापित– 1973, पर झारखंड की ऑफिसियल साइट के अनुसार इस बांध का निर्माण 1972 में शुरू हुआ जिसे 1985 में चालू किया गया) बोकारो जिले में दामोदर नदी पर स्थित है। ।
- (च) बालपहाड़ी डैम:– यह बांध गिरिडीह जिले में बराकर नदी पर 1959 में बनाया गया है। ।
- (छ) कोनार डैम :– कोनार डैम, बोकारो जिले में दामोदर को सहायक नदी , कोनार नदी में स्थित है। ।
- ( ज) अय्यर और बेरमो डैम :– ये दोनों डैम , बोकारो जिले में दामोदर नदी पर स्थित हैं। ।
- जलविद्युत गृह:– 🪷 तिलैया जल विद्युतगृह(1953 में स्थापित) , कोडरमा जिले में बराकर नदी पर स्थित हैं, जिसकी विद्युत उत्पादन क्षमता 4 मेगावाट तक है। यह दामोदर नदी घाटी परियोजना के तहत स्थापित पहला जल विद्युतगृह है। 🪷 कोनार जलविद्युत गृह (1955 से स्थित), हजारीबाग जिले में कोनार नदी पर स्थित है। इसकी विद्युत उत्पादन क्षमता 40 मेगावाट है। 🪷मैथन जलविद्युत गृह(1957 में स्थापित), धनबाद जिले में बराकर नदी पर स्थित है। इसकी उत्पादन क्षमता 60 मेगावाट है। ।
- विशेष: दामोदर नदी घाटी परियोजना, अमेरिका की टेनेसी नदी घाटी परियोजना से प्रेरित है।
(B). स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना
- सहयोग: विश्व बैंक (World Bank) की सहायता से, पांचवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान की गई हैं। ।
- इस नदी घाटी परियोजना से लाभान्वित राज्य:– झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल।
- इस नदी घाटी परियोजना के तहत बनाए गए मुख्य बांध:– (i)चांडिल बांध– यह सरायकेला खरसावां जिले में स्वर्णरेखा नदी पर 1982 से स्थापित hai । (ii ) इचा बांध(1983 से स्थापित )– यह स्वर्णरेखा नदी की सहायक नदी खरखई नदी पर स्थित hai. (iii ) गालूडीह बांध(1983 से स्थापित )– यह स्वर्णरेखा नदी पर स्थित hai. (iv) गेतलसूद रिजर्वायर(1971) – यह भी स्वर्णरेखा नदी पर ही स्थित hai. ।
(C) मयूराक्षी नदी घाटी परियोजना
- नदी:– मयूराक्षी नदी जिसे मोर नदी भी कही जाती है, उसपर स्थित है।।
- संयुक्त परियोजना:– यह झारखंड और पश्चिम बंगाल की संयुक्त परियोजना है, जिसे कनाडा की सहायता से बनाईं गई है। ।
- मसानजोर बांध:– इस परियोजना के तहत दुमका जिले में मसानजोर बांध बनाया गया है। ।
- विशेष तथ्य:– चूंकि मसानजोर डैम को कनाडा की सहायता से बनाई गई हैं। इसीलिए मसानजोर डैम को,कनाडा डैम के नाम से भी जानते हैं । ।
(D) कोयलकारो नदी घाटी परियोजना
- यह नदी घाटी परियोजना दक्षिणी कोयल और उसकी सहायक नदी कारो पर स्थित है । ।
- उद्देश्य: जल-विद्युत उत्पादन (Hydroelectricity)।
- इतिहास: इस परियोजना का स्थानीय लोगों के द्वारा भारी विरोध किया गया था, जिसके कारण 2003 में सरकार को इसे आधिकारिक तौर पर बंद करना पड़ा। ।
(E.)उत्तरी कोयल नदी घाटी परियोजना
- सोन की सहायक नदी उत्तरी कोयल नदी पर यह नदी घाटी परियोजना स्थित है। ।
- इसका मुख्य उद्देश्य पलामू और गढ़वा जैसे सूखाग्रस्त जिलों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।
(F)मंडल डैम परियोजना (Mandal Dam Project)
- इस मंडल डैम को उत्तरी कोयल नदी घाटी परियोजना के तहत ही बनाया गया था।
- लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के पास कुटकू नामक स्थान पर स्थित है।
- हालिया स्थिति:– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में इसके अधूरे काम को पूरा करने के लिए आधारशिला रखी थी। इसे नीलांबर-पीतांबर परियोजना के रूप में भी जाना जाता है।
- ⚠️इस बांध की ऊंचाई को लेकर विवाद रहा है क्योंकि इससे 'पलामू टाइगर रिजर्व' और बेतला राष्ट्रीय उद्यान का कुछ हिस्सों के डूब जाने की खतरा थी। ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ):
- प्रश्न: झारखंड की पहली नदी घाटी परियोजना कौन सी है?
उत्तर: दामोदर घाटी परियोजना (1948)। - प्रश्न: कनाडा बांध किस नदी पर है?
उत्तर: मयूराक्षी नदी (दुमका)।

