झारखंड करेंट अफेयर्स फरवरी 2026|Jharkhand Current Affairs February 2026 | सम्पूर्ण मासिक करंट अफेयर्स JSSC, JPSC, JTET, Police Exam Special

Jharkhand Current Affairs February 2026 | Complete Notes

झारखंड करेंट अफेयर्स

फरवरी 2026 (Jharkhand Special)

JSSC CGL| JHARKHAND CGL TECHNICAL |JHARKHAND FIELD WORKER| JSSC | JPSC | JTET | Jharkhand Police Special Notes

विषय सूची

  1. अबुआ दिशोम बजट 2026-27
  2. फायर वॉरियर ड्राइव (Fire Warrior Drive) – फरवरी 2026
  3. NeVA सेवा केंद्र (National e-Vidhan Application) – फरवरी 2026
  4. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का झारखंड दौरा – फरवरी 2026
  5. शिक्षा क्षेत्र की महत्वपूर्ण घोषणाएँ – झारखंड बजट 2026-27
  6. फरवरी 2026 में झारखंड के खिलाड़ियों की प्रमुख उपलब्धियाँ
  7. ग्रामीण विकास एवं पेसा कानून (PESA Act) – झारखंड फरवरी 2026
  8. पर्यटन एवं संस्कृति – झारखंड फरवरी 2026
  9. कृषि, सिंचाई एवं जल संसाधन – झारखंड फरवरी 2026
  10. ग्लॉसोप्टेरिस के जीवाश्म

1. अबुआ दिशोम बजट 2026-27

24 फरवरी 2026 को झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹1,58,560 करोड़ का बजट विधानसभा में प्रस्तुत किया। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने यह बजट पेश किया। यह बजट "अबुआ दिशोम बजट" के नाम से प्रस्तुत किया गया, जिसका अर्थ है – "हमारा अपना झारखंड"।

पृष्ठभूमि

झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है। राज्य सरकार ने बजट को स्थानीय संस्कृति और जनजातीय पहचान से जोड़ने के लिए "अबुआ दिशोम" नाम दिया। इस बजट का मुख्य उद्देश्य विकास की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है।

बजट की प्रमुख बातें

  • कुल बजट – ₹1,58,560 करोड़
  • पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9% वृद्धि
  • सामाजिक क्षेत्र – ₹67,459 करोड़
  • आर्थिक क्षेत्र – ₹59,044 करोड़
  • सामान्य क्षेत्र – ₹32,055 करोड़

महिलाओं के लिए प्रावधान

महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना और अन्य महिला कल्याण कार्यक्रमों हेतु बड़ी राशि का प्रावधान किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग को ₹22,995 करोड़ से अधिक राशि दी गई।

शिक्षा क्षेत्र

  • 100 नए CM School of Excellence
  • डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा
  • शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • चतरा में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की घोषणा

कृषि क्षेत्र

किसानों की आय बढ़ाने के लिए बिरसा बीज उत्पादन योजना, झारखंड मिलेट मिशन, फसल बीमा तथा सौर सिंचाई योजनाओं को विशेष महत्व दिया गया।

स्वास्थ्य क्षेत्र

  • 750 अबुआ दवाखाना खोलने का लक्ष्य
  • कैंसर उपचार योजना
  • मेडिकल कॉलेजों का विस्तार

झारखंड पर प्रभाव

यह बजट राज्य में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को गति देगा। विशेष रूप से आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

कृषि एवं किसान कल्याण

झारखंड की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है। इसलिए कृषि क्षेत्र के लिए लगभग ₹4,884 करोड़ का प्रावधान किया गया।

  • बिरसा बीज उत्पादन योजना
  • झारखंड मिलेट मिशन
  • फसल बीमा
  • कृषि यंत्रीकरण
  • सौर सिंचाई योजना
  • किसानों की आय वृद्धि कार्यक्रम

जल संसाधन एवं सिंचाई

  • कुल आवंटन – ₹2,714 करोड़
  • नई सिंचाई परियोजनाएँ
  • जल संरक्षण कार्यक्रम
  • छोटे एवं मध्यम सिंचाई प्रोजेक्ट

ग्रामीण विकास

ग्रामीण विकास विभाग को ₹12,346 करोड़ से अधिक राशि प्रदान की गई।

  • ग्रामीण सड़क निर्माण
  • आवास योजनाएँ
  • पेयजल सुविधाएँ
  • PESA नियमों का क्रियान्वयन
  • ग्राम पंचायत सशक्तिकरण

पर्यटन एवं संस्कृति

झारखंड की धार्मिक एवं प्राकृतिक विरासत को बढ़ावा देने हेतु पर्यटन, कला, संस्कृति एवं खेल विभाग को विशेष प्रावधान दिया गया।

  • बैद्यनाथ धाम (देवघर)
  • राजरप्पा मंदिर
  • नेतरहाट
  • दशम, जोन्हा एवं हंडरू जलप्रपात
  • ईको-टूरिज्म विकास

युवाओं एवं रोजगार पर फोकस

  • कौशल विकास कार्यक्रम
  • रोजगारोन्मुखी कॉलेज
  • MSME क्षेत्र को बढ़ावा
  • निवेश एवं औद्योगिक विकास

झारखंड के लिए महत्व

आबुआ दिशोम बजट 2026-27 को झारखंड के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी बजटों में से एक माना जा रहा है। यह बजट महिलाओं, किसानों, युवाओं, आदिवासियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित है। इसके माध्यम से सरकार ने "समावेशी विकास" और "आत्मनिर्भर झारखंड" की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

✔ बजट नाम – आबुआ दिशोम बजट 2026-27
✔ प्रस्तुतकर्ता – राधाकृष्ण किशोर (वित्त मंत्री)
✔ प्रस्तुति तिथि – 24 फरवरी 2026
✔ कुल बजट – ₹1,58,560 करोड़
✔ वृद्धि – लगभग 9%
✔ सामाजिक क्षेत्र – ₹67,459.54 करोड़
✔ आर्थिक क्षेत्र – ₹59,044.63 करोड़
✔ सामान्य क्षेत्र – ₹32,055.83 करोड़
✔ मैया सम्मान योजना – ₹14,066 करोड़
✔ महिला खुशहाली योजना – ₹25 करोड़
✔ 100 नए CM School of Excellence
✔ डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय – चतरा

2.फायर वॉरियर ड्राइव (Fire Warrior Drive) – फरवरी 2026

फरवरी 2026 में झारखंड वन विभाग द्वारा राज्य में बढ़ती वनाग्नि (Forest Fire) की घटनाओं को रोकने के लिए "फायर वॉरियर ड्राइव" की शुरुआत की गई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वनाग्नि की घटनाओं को शून्य के करीब लाना है।

पृष्ठभूमि

झारखंड का लगभग एक-तिहाई भूभाग वनाच्छादित है। हर वर्ष फरवरी से जून के बीच जंगलों में आग लगने की घटनाएँ बढ़ जाती हैं। इन घटनाओं से वन्यजीवों, जैव विविधता तथा पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए झारखंड वन विभाग ने फायर वॉरियर अभियान शुरू किया।

शुरुआत कब हुई?

  • अभियान की शुरुआत – फरवरी 2026
  • संचालन – झारखंड वन विभाग
  • उद्देश्य – वनाग्नि मुक्त झारखंड

मुख्य उद्देश्य

  • वनाग्नि की घटनाओं को न्यूनतम करना
  • स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाना
  • वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा
  • जैव विविधता संरक्षण
  • आग लगने पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना

प्रमुख विशेषताएँ

इस अभियान के अंतर्गत वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लगभग 28,000 ग्रामीणों को "फायर वॉरियर" के रूप में जोड़ा गया। इन सभी को विभिन्न व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से वन विभाग से सीधे जोड़ा गया ताकि आग लगने की सूचना तुरंत उपलब्ध हो सके।

  • लगभग 28,000 ग्रामीण शामिल
  • भविष्य में संख्या 50,000 तक बढ़ाने का लक्ष्य
  • व्हाट्सएप आधारित त्वरित सूचना तंत्र
  • गांव स्तर पर निगरानी व्यवस्था
  • सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर

प्रशिक्षण कार्यक्रम

फायर वॉरियर्स को वनाग्नि रोकथाम एवं नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कुछ चयनित व्यक्तियों को "मास्टर ट्रेनर" के रूप में विकसित किया जाएगा, जो अन्य ग्रामीणों को प्रशिक्षण देंगे।

  • आग रोकने की तकनीक
  • वन सुरक्षा उपाय
  • आपातकालीन प्रतिक्रिया
  • वन्यजीव संरक्षण जागरूकता
  • सामुदायिक नेतृत्व विकास

तकनीकी सहायता

वन विभाग ने वनाग्नि की शीघ्र पहचान के लिए ड्रोन, सैटेलाइट अलर्ट सिस्टम और कंट्रोल रूम की व्यवस्था की है। जिला एवं वन प्रक्षेत्र स्तर पर 24×7 निगरानी की जाएगी।

  • ड्रोन निगरानी
  • सैटेलाइट आधारित अलर्ट
  • 24×7 कंट्रोल रूम
  • वन विभाग एवं आपदा प्रबंधन विभाग का समन्वय

झारखंड के लिए महत्व

यह अभियान वन संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से स्थानीय समुदायों को सीधे वन सुरक्षा से जोड़ा गया है। इससे वनाग्नि की घटनाओं में कमी आने, वन्यजीवों की रक्षा होने तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

✔ अभियान का नाम – फायर वॉरियर ड्राइव (Fire Warrior Drive)
✔ शुरुआत – फरवरी 2026
✔ विभाग – झारखंड वन विभाग
✔ उद्देश्य – वनाग्नि की घटनाओं को शून्य के करीब लाना
✔ शामिल ग्रामीण – लगभग 28,000
✔ लक्ष्य – 50,000 फायर वॉरियर तैयार करना
✔ तकनीक – ड्रोन, सैटेलाइट अलर्ट, व्हाट्सएप नेटवर्क
✔ विशेष फोकस – सामुदायिक वन संरक्षण

3. NeVA सेवा केंद्र (National e-Vidhan Application) – फरवरी 2026

फरवरी 2026 में झारखंड विधानसभा ने डिजिटल शासन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए रांची स्थित विधानसभा परिसर में NeVA (National e-Vidhan Application) सेवा केंद्र का उद्घाटन किया। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा 11 फरवरी 2026 को किया गया। इस पहल का उद्देश्य विधानसभा की कार्यवाही को पूरी तरह डिजिटल एवं पेपरलेस बनाना है। 0

पृष्ठभूमि

पहले विधानसभा की अधिकांश कार्यवाही कागजी दस्तावेजों पर आधारित होती थी। विधायकों को प्रश्न, नोटिस, विधेयक और अन्य दस्तावेज जमा करने के लिए भौतिक रूप से विधानसभा कार्यालय जाना पड़ता था। डिजिटल इंडिया मिशन के तहत अब सभी विधानसभाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए NeVA परियोजना लागू की जा रही है। 1

NeVA क्या है?

NeVA (National e-Vidhan Application) भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय की एक डिजिटल पहल है। यह एकीकृत प्लेटफॉर्म विधायकों को प्रश्न, नोटिस, कार्यसूची, विधेयक, दस्तावेज और सदन की कार्यवाही ऑनलाइन उपलब्ध कराता है। 2

मुख्य उद्देश्य

  • झारखंड विधानसभा को पेपरलेस बनाना
  • डिजिटल विधायी कार्यप्रणाली लागू करना
  • पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाना
  • समय और संसाधनों की बचत करना
  • विधायकों को कहीं से भी डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराना

मुख्य विशेषताएँ

  • सभी विधायी दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध
  • मोबाइल एवं टैबलेट आधारित एक्सेस
  • प्रश्न एवं नोटिस ऑनलाइन जमा करने की सुविधा
  • डिजिटल कार्यसूची (List of Business)
  • विधेयकों एवं रिपोर्टों का ऑनलाइन अध्ययन
  • कागज के उपयोग में भारी कमी

विधायकों को टैबलेट वितरण

NeVA प्रणाली के प्रभावी उपयोग हेतु मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्रनाथ महतो ने विधायकों एवं मंत्रियों को NeVA एप से युक्त टैबलेट वितरित किए। इसके साथ उपयोग संबंधी प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। 3

झारखंड को लाभ

  • विधानसभा की कार्यवाही अधिक पारदर्शी होगी
  • कागज एवं प्रशासनिक खर्च में कमी आएगी
  • दस्तावेजों तक त्वरित पहुँच संभव होगी
  • डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा
  • विधानसभा की कार्यकुशलता बढ़ेगी

महत्व

NeVA सेवा केंद्र झारखंड विधानसभा को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित विधानसभा में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह "One Nation, One Application" की अवधारणा पर आधारित राष्ट्रीय परियोजना का हिस्सा है। 4

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

✔ NeVA का पूर्ण रूप – National e-Vidhan Application
✔ उद्घाटन – 11 फरवरी 2026
✔ स्थान – झारखंड विधानसभा, रांची
✔ उद्घाटनकर्ता – हेमंत सोरेन
✔ उद्देश्य – पेपरलेस विधानसभा
✔ नोडल मंत्रालय – संसदीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार
✔ विशेषता – विधायक प्रश्न, नोटिस एवं दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर सकते हैं

4. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का झारखंड दौरा – फरवरी 2026

फरवरी 2026 में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड का दौरा किया। यह दौरा विशेष रूप से जमशेदपुर में आयोजित धार्मिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के कारण चर्चा में रहा। राष्ट्रपति ने 26 फरवरी 2026 को झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लिया। 0

पृष्ठभूमि

द्रौपदी मुर्मू का झारखंड से विशेष संबंध रहा है। वे वर्ष 2015 से 2021 तक झारखंड की राज्यपाल रह चुकी हैं। झारखंड की पहली महिला राज्यपाल तथा पहली आदिवासी महिला राज्यपाल के रूप में उन्होंने राज्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इस कारण उनका झारखंड दौरा राज्य के लिए विशेष महत्व रखता है।

दौरे की तिथि

  • झारखंड दौरा – 26 फरवरी 2026
  • जिला – पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर)
  • अवधि – राष्ट्रीय दौरे (24–27 फरवरी 2026) का हिस्सा

श्री जगन्नाथ मंदिर परियोजना का भूमि पूजन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जमशेदपुर के कदमा मरीन ड्राइव क्षेत्र में निर्मित होने वाले श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल सेंटर के भूमि पूजन कार्यक्रम में भाग लिया। यह परियोजना श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर ट्रस्ट द्वारा विकसित की जा रही है। इस केंद्र का उद्देश्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। 1

मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज का दौरा

भूमि पूजन कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति ने मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज (MTMC), जमशेदपुर का दौरा किया। यह कॉलेज टाटा स्टील एवं मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन का संयुक्त उपक्रम है।

  • छात्रों से संवाद किया
  • कॉलेज परिसर का अवलोकन किया
  • स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के महत्व पर बल दिया
  • संस्थान के शिक्षकों एवं अधिकारियों से मुलाकात की
  • परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम में भाग लिया

राष्ट्रपति की यह यात्रा संस्थान के लिए गौरव का विषय मानी गई। 2

दौरे का महत्व

  • जमशेदपुर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली
  • धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिला
  • स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र को प्रोत्साहन मिला
  • झारखंड के विकास कार्यक्रमों को राष्ट्रीय मंच मिला
  • जनजातीय एवं सांस्कृतिक विरासत पर विशेष ध्यान आकर्षित हुआ

झारखंड से राष्ट्रपति का संबंध

विवरण तथ्य
नाम द्रौपदी मुर्मू
भारत की राष्ट्रपति 15वीं राष्ट्रपति
झारखंड की राज्यपाल 2015–2021
झारखंड दौरा 26 फरवरी 2026
मुख्य स्थान जमशेदपुर

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

✔ राष्ट्रपति – श्रीमती द्रौपदी मुर्मू
✔ झारखंड दौरा – 26 फरवरी 2026
✔ जिला – पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर)
✔ भूमि पूजन – श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल सेंटर
✔ कॉलेज दौरा – मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर
✔ झारखंड की राज्यपाल – 2015 से 2021
✔ भारत की 15वीं राष्ट्रपति
✔ दौरे का उद्देश्य – धार्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों में भागीदारी

5. शिक्षा क्षेत्र की महत्वपूर्ण घोषणाएँ – झारखंड बजट 2026-27

आबुआ दिशोम बजट 2026-27 में झारखंड सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया। राज्य सरकार का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुखी एवं तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गईं।

पृष्ठभूमि

झारखंड में लंबे समय से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी महसूस की जा रही थी। इसके अलावा उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा के अवसर भी सीमित थे। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान किए।

शिक्षा विभाग को बजटीय आवंटन

वित्तीय वर्ष 2026-27 में शिक्षा विभाग को लगभग ₹16,251.43 करोड़ का बजट आवंटित किया गया। यह राज्य के कुल बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

100 नए CM School of Excellence

राज्य सरकार ने झारखंड के विभिन्न जिलों में 100 नए मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय (CM School of Excellence) स्थापित करने की घोषणा की।

  • CBSE आधारित शिक्षा व्यवस्था
  • स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा
  • डिजिटल लैब एवं कंप्यूटर लैब
  • आधुनिक पुस्तकालय
  • खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की व्यवस्था
  • प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु विशेष मार्गदर्शन

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा

नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप डिजिटल शिक्षा पर विशेष बल दिया गया।

  • स्मार्ट क्लासरूम का विस्तार
  • ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म का विकास
  • डिजिटल कंटेंट उपलब्ध कराना
  • आईसीटी आधारित शिक्षण व्यवस्था
  • ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा

डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, चतरा

उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चतरा जिले में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा की गई।

इस विश्वविद्यालय की स्थापना से चतरा, हजारीबाग, कोडरमा, लातेहार एवं आसपास के जिलों के छात्रों को उच्च शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे।

रोजगारोन्मुखी कॉलेजों की स्थापना

राज्य सरकार ने 7 जिलों में 12 रोजगारोन्मुखी डिग्री कॉलेज स्थापित करने की घोषणा की।

  • स्किल आधारित शिक्षा
  • तकनीकी प्रशिक्षण
  • उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रम
  • रोजगार सृजन पर विशेष फोकस

तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा

युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने हेतु तकनीकी शिक्षा संस्थानों को मजबूत करने का निर्णय लिया गया।

  • पॉलिटेक्निक संस्थानों का विस्तार
  • आईटीआई का आधुनिकीकरण
  • नई तकनीकी प्रयोगशालाएँ
  • कौशल विकास कार्यक्रम
  • उद्योग आधारित प्रशिक्षण

शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम

राज्य सरकार ने शिक्षण गुणवत्ता में सुधार हेतु शिक्षकों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की घोषणा की।

  • डिजिटल शिक्षण प्रशिक्षण
  • नई शिक्षा नीति आधारित प्रशिक्षण
  • विषय विशेषज्ञ प्रशिक्षण
  • ऑनलाइन एवं ऑफलाइन कार्यशालाएँ

बालिका शिक्षा को बढ़ावा

बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन योजनाओं का विस्तार किया गया।

  • बालिका छात्रवृत्ति
  • साइकिल वितरण योजना
  • उच्च शिक्षा हेतु सहायता
  • आवासीय विद्यालयों का विस्तार

आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों के लिए पहल

झारखंड के अनुसूचित एवं दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए।

  • एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय
  • जनजातीय छात्रावास
  • स्थानीय भाषाओं में शिक्षा
  • डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता

शिक्षा क्षेत्र की घोषणाओं का महत्व

  • शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा
  • ग्रामीण विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिलेंगे
  • डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा
  • रोजगारोन्मुखी शिक्षा का विस्तार होगा
  • उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे
  • प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर आधार तैयार होगा
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

✔ शिक्षा विभाग बजट – ₹16,251.43 करोड़
✔ 100 नए CM School of Excellence
✔ चतरा में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय
✔ 7 जिलों में 12 रोजगारोन्मुखी कॉलेज
✔ डिजिटल शिक्षा एवं स्मार्ट क्लासरूम पर विशेष जोर
✔ शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
✔ तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार
✔ बालिका शिक्षा एवं जनजातीय शिक्षा पर विशेष फोकस

6. फरवरी 2026 में झारखंड के खिलाड़ियों की प्रमुख उपलब्धियाँ

फरवरी 2026 में झारखंड के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। विशेष रूप से पैरा खेलों, हॉकी एवं तीरंदाजी से जुड़े खिलाड़ियों ने राज्य का नाम रोशन किया।

1. पैरा थ्रोबॉल नेशनल फेडरेशन कप 2026

3 से 5 फरवरी 2026 तक राजस्थान के झुंझुनूं में आयोजित Para Throwball National Federation Cup 2026 में झारखंड महिला टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। फाइनल मुकाबले में झारखंड ने मेजबान राजस्थान को 21-17 से हराया।

  • खेल – पैरा थ्रोबॉल
  • प्रतियोगिता – National Federation Cup 2026
  • स्थान – झुंझुनूं (राजस्थान)
  • तिथि – 3 से 5 फरवरी 2026
  • उपलब्धि – स्वर्ण पदक
  • फाइनल स्कोर – झारखंड 21-17 राजस्थान

झारखंड महिला टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासित एवं उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया।

2. झारखंड पुरुष पैरा थ्रोबॉल टीम

  • खेल – पैरा थ्रोबॉल
  • प्रतियोगिता – National Federation Cup 2026
  • उपलब्धि – चौथा स्थान
  • सेमीफाइनल तक शानदार प्रदर्शन

3. अमर हासा पूर्ति

पश्चिमी सिंहभूम जिले के युवा आदिवासी खिलाड़ी अमर हासा पूर्ति ने 7वीं राष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में झारखंड का प्रतिनिधित्व किया। कैंसर के कारण एक पैर खोने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व किया।

  • खेल – पैरा तीरंदाजी (Para Archery)
  • जिला – पश्चिमी सिंहभूम
  • प्रतियोगिता – 7th National Para Archery Championship
  • स्थान – पटियाला (पंजाब)
  • विशेष उपलब्धि – विपरीत परिस्थितियों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचे

4. राज्य स्तरीय पैरा एथलेटिक्स एवं पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप

फरवरी 2026 में जमशेदपुर के JRD टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 25वीं राज्य स्तरीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप तथा 6वीं राज्य स्तरीय पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप आयोजित हुई।

  • स्थान – जमशेदपुर
  • भाग लेने वाले खिलाड़ी – लगभग 200
  • जिले – 18 जिले
  • मुख्य खेल – पैरा एथलेटिक्स एवं पैरा बैडमिंटन

इस प्रतियोगिता में पूर्वी सिंहभूम जिला ओवरऑल चैंपियन बना, जबकि देवघर उपविजेता एवं रामगढ़ तीसरे स्थान पर रहा।

5. सलिमा टेटे

सिमडेगा की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी सलिमा टेटे भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं। फरवरी 2026 में वे भारतीय टीम के प्रशिक्षण शिविर एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगितियों की तैयारियों में शामिल थीं।

  • खेल – हॉकी
  • जिला – सिमडेगा
  • पोजीशन – मिडफील्डर
  • भारतीय महिला हॉकी टीम की प्रमुख खिलाड़ी

6. दीपिका कुमारी

रांची की विश्व प्रसिद्ध तीरंदाज दीपिका कुमारी भारतीय तीरंदाजी टीम के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगितियों की तैयारी में शामिल रहीं। वे झारखंड की सबसे सफल महिला खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं।

  • खेल – तीरंदाजी (Recurve Archery)
  • जिला – रांची
  • विश्व नंबर-1 तीरंदाज रह चुकी हैं
  • भारत की प्रमुख तीरंदाज

7. खिलाड़ियों के लिए पेंशन योजना

6 फरवरी 2026 को झारखंड कैबिनेट ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए नई पेंशन योजना को मंजूरी दी। इस योजना के अंतर्गत खिलाड़ियों को ₹5,000 से ₹20,000 प्रतिमाह तक पेंशन दी जाएगी।

  • अधिकतम पेंशन – ₹20,000 प्रतिमाह
  • लाभार्थी – ओलंपिक, एशियाई खेल, विश्व कप एवं राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी
  • उद्देश्य – खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना
फरवरी 2026 खेल करेंट अफेयर्स (झारखंड)

✔ झारखंड महिला पैरा थ्रोबॉल टीम – स्वर्ण पदक विजेता
✔ प्रतियोगिता – Para Throwball National Federation Cup 2026
✔ अमर हासा पूर्ति – राष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में प्रतिनिधित्व
✔ जमशेदपुर में राज्य स्तरीय पैरा एथलेटिक्स एवं बैडमिंटन चैंपियनशिप आयोजित
✔ पूर्वी सिंहभूम – ओवरऑल चैंपियन
✔ सलिमा टेटे – हॉकी
✔ दीपिका कुमारी – तीरंदाजी
✔ खिलाड़ियों के लिए ₹5,000 से ₹20,000 मासिक पेंशन योजना स्वीकृत

7. ग्रामीण विकास एवं पेसा कानून (PESA Act) – झारखंड फरवरी 2026

फरवरी 2026 में झारखंड सरकार ने ग्रामीण विकास, ग्राम स्वशासन, पंचायती राज संस्थाओं की मजबूती तथा अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों के अधिकारों को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया। विशेष रूप से पेसा कानून (PESA Act) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई कदम उठाए गए, जो झारखंड के आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण रहे।

पृष्ठभूमि

झारखंड की लगभग 76% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। राज्य के कई जिले जैसे खूंटी, सिमडेगा, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, लातेहार एवं पाकुड़ अनुसूचित क्षेत्रों में आते हैं। इन क्षेत्रों में ग्राम सभा को अधिक अधिकार देने हेतु भारत सरकार ने वर्ष 1996 में PESA Act लागू किया था।

PESA Act क्या है?

PESA का पूर्ण रूप Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996 है। यह कानून अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को विशेष अधिकार प्रदान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदायों की परंपराओं, संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों एवं स्थानीय स्वशासन की रक्षा करना है।

पेसा कानून की मुख्य विशेषताएँ

  • ग्राम सभा को सर्वोच्च इकाई माना गया है।
  • जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित होती है।
  • लघु वन उपज पर ग्राम सभा का अधिकार होता है।
  • भूमि अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा से परामर्श आवश्यक है।
  • स्थानीय संसाधनों के प्रबंधन में ग्राम सभा की भूमिका होती है।
  • जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं की सुरक्षा की जाती है।

फरवरी 2026 में झारखंड सरकार की पहल

फरवरी 2026 में राज्य सरकार ने पेसा कानून को जमीनी स्तर पर लागू करने, ग्राम सभाओं को अधिक सक्रिय बनाने तथा पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।

  • ग्राम सभा सशक्तिकरण अभियान चलाया गया।
  • पंचायत प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
  • वनाधिकार एवं पेसा अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई।
  • आदिवासी क्षेत्रों में विकास योजनाओं की निगरानी में ग्राम सभा की भूमिका बढ़ाई गई।

ग्रामीण विकास से संबंधित प्रमुख पहल

ग्रामीण विकास विभाग को आबुआ दिशोम बजट 2026-27 में विशेष बजटीय सहायता प्रदान की गई। इसका उद्देश्य ग्रामीण आधारभूत संरचना को मजबूत बनाना था।

  • ग्रामीण सड़क निर्माण
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का विस्तार
  • पेयजल योजनाएँ
  • ग्रामीण आवास योजनाएँ
  • मनरेगा के माध्यम से रोजगार सृजन
  • स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन
  • ग्राम पंचायत भवनों का निर्माण

जल, जंगल और जमीन पर जोर

झारखंड सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। पेसा कानून के माध्यम से ग्राम सभाओं को निर्णय प्रक्रिया में अधिक अधिकार दिए जा रहे हैं।

आदिवासी समुदाय के लिए महत्व

  • स्थानीय स्वशासन को मजबूती मिलती है।
  • जल, जंगल और जमीन की रक्षा होती है।
  • ग्राम सभा की निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है।
  • परंपरागत संस्कृति एवं रीति-रिवाज सुरक्षित रहते हैं।
  • विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होती है।

झारखंड के अनुसूचित क्षेत्र

जिला विशेषता
खूंटी आदिवासी बहुल जिला
गुमला PESA क्षेत्र
सिमडेगा अनुसूचित क्षेत्र
पश्चिमी सिंहभूम वन एवं खनिज संपदा से समृद्ध
लातेहार जनजातीय आबादी अधिक
पाकुड़ अनुसूचित क्षेत्र

फरवरी 2026 में महत्व

फरवरी 2026 में ग्रामीण विकास एवं पेसा कानून झारखंड की राजनीतिक एवं प्रशासनिक चर्चाओं का महत्वपूर्ण विषय रहा। राज्य सरकार द्वारा ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने एवं आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों ने इस विषय को विशेष महत्व प्रदान किया।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

✔ PESA का पूर्ण रूप – Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996
✔ कानून लागू – 1996
✔ उद्देश्य – अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को अधिकार देना
✔ ग्राम सभा – PESA की सबसे महत्वपूर्ण इकाई
✔ जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय भागीदारी
✔ झारखंड के प्रमुख PESA जिले – खूंटी, गुमला, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, पाकुड़
✔ फरवरी 2026 में ग्राम सभा सशक्तिकरण पर विशेष जोर
✔ ग्रामीण विकास विभाग को बजट में विशेष प्राथमिकता

8. पर्यटन एवं संस्कृति – झारखंड फरवरी 2026

फरवरी 2026 में झारखंड सरकार ने पर्यटन एवं संस्कृति के विकास को विशेष प्राथमिकता दी। राज्य अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों, धार्मिक स्थलों, जनजातीय संस्कृति एवं ऐतिहासिक धरोहरों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। सरकार द्वारा पर्यटन अवसंरचना के विकास, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु कई महत्वपूर्ण पहल की गईं।

पृष्ठभूमि

झारखंड को "झरनों की भूमि" कहा जाता है। राज्य में अनेक धार्मिक स्थल, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, जलप्रपात एवं ऐतिहासिक धरोहर स्थित हैं। पर्यटन क्षेत्र रोजगार सृजन एवं आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है।

1. श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल सेंटर, जमशेदपुर

26 फरवरी 2026 को भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने जमशेदपुर में श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल सेंटर का भूमि पूजन किया।

  • स्थान – कदमा, जमशेदपुर
  • भूमि पूजन – 26 फरवरी 2026
  • मुख्य अतिथि – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
  • उद्देश्य – धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना

2. बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर)

देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह झारखंड का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल है। फरवरी 2026 में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार हेतु नई योजनाओं पर कार्य जारी रहा।

  • जिला – देवघर
  • विशेषता – 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल
  • राज्य का प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र

3. राजरप्पा मंदिर

रामगढ़ जिले में स्थित माँ छिन्नमस्तिका मंदिर झारखंड के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक है।

  • स्थान – राजरप्पा, रामगढ़
  • देवी – माँ छिन्नमस्तिका
  • धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र

4. नेतरहाट

नेतरहाट को "छोटानागपुर की रानी" कहा जाता है। यह झारखंड का सबसे प्रसिद्ध हिल स्टेशन है।

  • जिला – लातेहार
  • विशेषता – सूर्योदय एवं सूर्यास्त दृश्य
  • ईको-टूरिज्म का प्रमुख केंद्र

5. झारखंड के प्रमुख जलप्रपात

जलप्रपात जिला विशेषता
हंडरू जलप्रपात रांची राज्य का प्रसिद्ध जलप्रपात
जोन्हा जलप्रपात रांची गौतमधारा नाम से प्रसिद्ध
दशम जलप्रपात रांची कांची नदी पर स्थित
हिरनी जलप्रपात पश्चिमी सिंहभूम घने जंगलों के बीच स्थित
लोध जलप्रपात लातेहार झारखंड का सबसे ऊँचा जलप्रपात

6. जनजातीय संस्कृति का संरक्षण

फरवरी 2026 में झारखंड सरकार ने जनजातीय संस्कृति, लोक कला एवं पारंपरिक विरासत के संरक्षण हेतु विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए।

  • सरहुल महोत्सव
  • करमा पर्व
  • सोहराय उत्सव
  • टुसू पर्व
  • मांदर एवं नगाड़ा लोक संगीत

7. जनजातीय संग्रहालय एवं सांस्कृतिक केंद्र

राज्य सरकार ने आदिवासी इतिहास एवं संस्कृति को संरक्षित करने के लिए संग्रहालयों एवं सांस्कृतिक केंद्रों के विकास पर विशेष बल दिया।

  • भगवान बिरसा मुंडा स्मृति स्थल
  • उलगुलान स्मारक
  • जनजातीय शोध संस्थान
  • सांस्कृतिक संरक्षण परियोजनाएँ

8. ईको-टूरिज्म विकास

फरवरी 2026 में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने हेतु वन क्षेत्रों एवं प्राकृतिक स्थलों के विकास पर जोर दिया गया।

  • बेतला राष्ट्रीय उद्यान
  • पलामू टाइगर रिजर्व
  • दलमा वन्यजीव अभयारण्य
  • पतरातू घाटी

पर्यटन क्षेत्र का महत्व

  • रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
  • जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिलती है।
  • धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
  • राज्य की आय में वृद्धि होती है।

फरवरी 2026 में विशेष महत्व

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जमशेदपुर में श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल सेंटर का भूमि पूजन, ईको-टूरिज्म को बढ़ावा तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़े प्रयास फरवरी 2026 के महत्वपूर्ण पर्यटन एवं संस्कृति विषय रहे।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

✔ बाबा बैद्यनाथ धाम – देवघर (12 ज्योतिर्लिंग)
✔ राजरप्पा मंदिर – रामगढ़
✔ नेतरहाट – छोटानागपुर की रानी
✔ लोध जलप्रपात – झारखंड का सबसे ऊँचा जलप्रपात
✔ हंडरू जलप्रपात – रांची
✔ बेतला राष्ट्रीय उद्यान – लातेहार
✔ पलामू टाइगर रिजर्व – झारखंड का एकमात्र टाइगर रिजर्व
✔ दलमा वन्यजीव अभयारण्य – पूर्वी सिंहभूम
✔ 26 फरवरी 2026 – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल सेंटर का भूमि पूजन
✔ प्रमुख जनजातीय पर्व – सरहुल, करमा, सोहराय, टुसू

9. कृषि, सिंचाई एवं जल संसाधन – झारखंड फरवरी 2026

झारखंड की लगभग 60 प्रतिशत से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। फरवरी 2026 में प्रस्तुत आबुआ दिशोम बजट 2026-27 में कृषि, सिंचाई एवं जल संसाधन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना तथा कृषि को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।

पृष्ठभूमि

झारखंड में अधिकांश कृषि वर्षा पर निर्भर है। अनियमित मानसून एवं सीमित सिंचाई सुविधाओं के कारण किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण सरकार ने कृषि उत्पादन बढ़ाने एवं सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए विशेष योजनाओं की घोषणा की।

कृषि विभाग को बजटीय आवंटन

आबुआ दिशोम बजट 2026-27 में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग को लगभग ₹4,884 करोड़ का प्रावधान किया गया।

  • किसानों की आय वृद्धि
  • बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता
  • मिलेट उत्पादन को बढ़ावा
  • सिंचाई सुविधाओं का विस्तार
  • आधुनिक कृषि तकनीक का उपयोग

1. बिरसा बीज उत्पादन योजना

राज्य सरकार ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए बिरसा बीज उत्पादन योजना को आगे बढ़ाने की घोषणा की।

  • उन्नत बीज उत्पादन को बढ़ावा
  • किसानों की उत्पादकता में वृद्धि
  • बीजों में आत्मनिर्भरता
  • स्थानीय किसानों को लाभ

2. झारखंड मिलेट मिशन

मोटे अनाज (Millets) के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए झारखंड मिलेट मिशन को विस्तारित किया गया।

  • रागी, बाजरा एवं कोदो उत्पादन को प्रोत्साहन
  • पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • किसानों की आय बढ़ाना
  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त खेती

3. फसल बीमा योजना

प्राकृतिक आपदाओं, सूखा एवं बाढ़ से किसानों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए फसल बीमा योजनाओं को मजबूत किया गया।

  • कृषि जोखिम कम करना
  • फसल नुकसान की भरपाई
  • छोटे एवं सीमांत किसानों को सुरक्षा

4. सौर सिंचाई योजना

फरवरी 2026 में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई परियोजनाओं को बढ़ावा देने की घोषणा की गई। इसका उद्देश्य किसानों को कम लागत पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।

  • सोलर पंप वितरण
  • बिजली खर्च में कमी
  • पर्यावरण अनुकूल सिंचाई
  • दूरस्थ क्षेत्रों के किसानों को लाभ

जल संसाधन विभाग

जल संसाधन विभाग को बजट में लगभग ₹2,714 करोड़ आवंटित किए गए।

मुख्य उद्देश्य

  • सिंचाई क्षमता बढ़ाना
  • जल संरक्षण
  • नई सिंचाई परियोजनाएँ
  • जलाशयों का विकास
  • ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाना

5. प्रमुख सिंचाई परियोजनाएँ

सरकार ने विभिन्न लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने पर बल दिया।

  • स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना
  • कोणार सिंचाई परियोजना
  • पुनासी जलाशय परियोजना
  • गुमानी बैराज परियोजना
  • मध्यम एवं लघु सिंचाई योजनाएँ

6. पुनासी जलाशय परियोजना

देवघर जिले में स्थित पुनासी जलाशय परियोजना झारखंड की महत्वपूर्ण सिंचाई एवं पेयजल परियोजनाओं में से एक है।

  • स्थान – देवघर
  • उद्देश्य – सिंचाई एवं पेयजल सुविधा
  • लाखों लोगों को लाभ
  • कृषि उत्पादन में वृद्धि

7. स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना

स्वर्णरेखा नदी पर आधारित यह परियोजना झारखंड की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है।

  • सिंचाई सुविधा विस्तार
  • कृषि उत्पादन बढ़ाना
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

8. जल संरक्षण अभियान

राज्य सरकार ने जल संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु तालाबों, चेक डैम एवं वर्षा जल संचयन परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया।

  • अमृत सरोवर योजना
  • वर्षा जल संचयन
  • चेक डैम निर्माण
  • भूजल संरक्षण

9. किसानों के लिए अन्य पहल

  • कृषि यंत्रीकरण योजना
  • किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • कृषि अनुसंधान को बढ़ावा
  • सहकारी समितियों का सशक्तिकरण
  • जैविक खेती को प्रोत्साहन

फरवरी 2026 में महत्व

फरवरी 2026 में प्रस्तुत आबुआ दिशोम बजट के माध्यम से कृषि एवं जल संसाधन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गईं। इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना तथा कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक बनाना है।

झारखंड के लिए महत्व

  • कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी।
  • किसानों की आय बढ़ेगी।
  • सिंचाई क्षमता का विस्तार होगा।
  • जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

✔ कृषि विभाग बजट – ₹4,884 करोड़
✔ जल संसाधन विभाग बजट – ₹2,714 करोड़
✔ बिरसा बीज उत्पादन योजना
✔ झारखंड मिलेट मिशन
✔ सौर सिंचाई योजना
✔ पुनासी जलाशय परियोजना – देवघर
✔ स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना
✔ अमृत सरोवर योजना
✔ च

10. ग्लॉसोप्टेरिस के जीवाश्म

ग्लॉसोप्टेरिस (Glossopteris) एक विलुप्त बीजधारी पौधा था, जो लगभग 25 से 30 करोड़ वर्ष पूर्व गोंडवाना भूभाग में पाया जाता था। इसके जीवाश्म भारत, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका तथा दक्षिण अमेरिका में पाए गए हैं।

झारखंड से संबंध

झारखंड के दामोदर घाटी क्षेत्र, विशेषकर झरिया, बोकारो, गिरिडीह एवं राजमहल क्षेत्र में ग्लॉसोप्टेरिस के जीवाश्म प्राप्त हुए हैं। इन जीवाश्मों से यह प्रमाणित होता है कि प्राचीन काल में ये क्षेत्र गोंडवाना भूभाग का हिस्सा थे।

महत्व

  • महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory) का प्रमाण।
  • गोंडवाना भूभाग के अस्तित्व की पुष्टि।
  • प्राचीन जलवायु एवं वनस्पति के अध्ययन में सहायक।
  • कोयला निर्माण की प्रक्रिया को समझने में महत्वपूर्ण।

महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत से संबंध

जर्मन वैज्ञानिक अल्फ्रेड वेगेनर (Alfred Wegener) ने महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत प्रस्तुत किया था। उन्होंने ग्लॉसोप्टेरिस के जीवाश्मों को अपने सिद्धांत के प्रमुख प्रमाणों में शामिल किया। क्योंकि समान जीवाश्म विभिन्न महाद्वीपों में पाए गए, इससे सिद्ध हुआ कि ये महाद्वीप कभी एक साथ जुड़े हुए थे।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

✔ ग्लॉसोप्टेरिस – विलुप्त बीजधारी पौधा
✔ काल – लगभग 25-30 करोड़ वर्ष पूर्व
✔ गोंडवाना भूभाग का प्रमुख पौधा
✔ झारखंड – झरिया, बोकारो, गिरिडीह, राजमहल क्षेत्र में जीवाश्म प्राप्त
✔ महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत का प्रमाण
✔ सिद्धांत के प्रतिपादक – अल्फ्रेड वेगेनर
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